Body Painting

बॉडी पेंटिंग एक अत्यन्त खूबसूरत कला है लेकिन इसके साथ ही यह बेहद रोचक भी है। आधुनिक काल में हम इसे पश्चिमी देशों में प्रचलित ही देखते हैं लेकिन यदि इतिहास के पिछले पन्ने पलटे जायें तो भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया व अन्य कई क़बीलों में भी इसका प्रचलन दृष्टिगोचर होगा। आदि मानव तो भिन्न-भिन्न प्रकार से अपने शरीर को सजाता-संवारता था। इसके लिए वो अपने शरीर को अलग-अलग रंगों द्वारा रंगता था व तरह-तरह की आकृतियां अपने शरीर पर उकेरता था। कले और कुछ अन्य तत्वों द्वारा बॉडी पेंटिंग भी काफ़ी प्रचलित थी जिसका प्रयोग कई क़बीलों में रस्मी रूप में था और इसका प्रयोग प्राय: वे किसी ख़ास मौक़े या उत्सव पर करते थे। इस प्रकार बॉडी पेंटिंग आधुनिक नहीं बल्कि बेहद पुरानी कला है। बस समय के साथ इसने अपना सिर्फ़ रूप ही बदला है। सामान्यत: बॉडी पेंटिंग सम्पूर्ण नग्न शरीर को रंगने जैसा भाव प्रकट करता है पर ऐसा हमेशा नहीं होता। बॉडी पेंटिंग में साधारणया चेहरे या शरीर के किसी एक भाग पर अजीबो-ग़रीब कलाकृतियां बनाना सम्मिलित होता है। कई बार ये सब बेहद दिलचस्प-सा प्रतीत होता है। बॉडी पेंटिंग स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार की होती है। ‘टैटू’ भी इसी का एक रूप है। ये ‘टैटू’ स्थायी भी होते हैं और अस्थायी भी। कई मनचले लोग अपने शरीर पर स्थायी ‘टैटू’ ही बनवा लेते हैं जो फि‍र कभी शरीर से मिटते नहीं, पर अधिकतर लोग अपने शरीर पर अस्थायी ‘टैटू’ ही बनवाते हैं। कई लोग अपने शरीर पर किसी फूल का टैटू बनवाते हैं तो कई प्रकृति से सम्बन्धित किसी आकृति का और कई तो अपने शरीर पर किसी कीड़े–मकौड़े का ही टैटू बनवा लेते हैं। मेहंदी भी बॉडी पेंटिंग का एक अस्थायी-सा रूप है जो ‘ हिना टैटू’ के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत में विख्यात है, विशेषतया दुलहनों के लिए। शादी-ब्याह और अन्य किसी विशेष मौक़े पर इसका बहुत ज़्यादा ही ट्रैंड है। यदि हम सम्‍पूर्ण शरीर की पेंटिंग की बात करें तो इसमें भी कई बार शरीर के काफ़ी हिस्से पर कपड़े पहन कर जैसे स्विम सूट आदि या केवल अन्‍दरूनी कपड़े पहन कर इस प्रकार पेंटिंग की जाती है कि यह पता ही नहीं चलता कपड़े कहां तक है और पेंटिंग कहां से शुरू हुई है। यही तो इस कला की ख़ासियत है।

यदि हम नग्न शरीर पर पेंटिंग की बात करे पश्चिमी सभ्यता में यह उस वक्त आई, जब नग्न होने की आज़ादी की लहर चली। इस लहर में पश्चिमी देशों की महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इस तरह की बॉडी पेंटिंग करवाने पर अभी तक विचार-विमर्श का सिलसिला जारी है। लेकिन यह काफ़ी प्रचलित है। इसमें अहम बात तो यह है कि इस तरह की बॉडी पेंटिंग जल्दी ही चर्चा में भी आ जाती है। इस संदर्भ में बॉलीवुड की एक अभिनेत्री का नाम भी मानस पटल पर आता है। यूं भी ऐसे अजीब कारनामे करने को बॉलीवुड कलाकार आगे रहते हैं। 1933 ई. के वर्ल्ड फेअर, शिकांगों में तो एक मॉडल को इसलिए गिरफ़्तार किया गया था क्योंकि उसे लोगों में असंतोष फैलाने का ज़िम्मेवार माना गया था।

यूनाईटिड स्टेट्स में 1990 ई. से बॉडी पेंटिंग भली-भान्ति प्रकार से मान्य हो गई और यह बेहद लोकप्रिय कला के रूप में सामने आई। आज समस्त संसार में बॉडी पेंटर्ज़ के तौर पर बहुत से कलाकार व्यवसायिक तौर पर कार्यरत हैं। उनका काम निरन्तर नज़र आ रहा है। बहुत-सी नई मॉडल्स निरन्तर व्यवसायिक काम पाने के लिए बॉडी पेंटिंग करवा कर अपना पोर्टफोलियो तैयार करवा लेती हैं ताकि उन्हें आगे बॉडी पेंटिंग की मॉडल के तौर पर काम मिल सके। कई मॉडल्स ने अपने पोर्टफोलियो इंटरनेट पर छोड़े होते हैं ताकि उन्‍हें काम मिलने में आसानी रहे। इस प्रकार ऐसी मॉडल उन पेंटर्ज़ को आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं जो ऐसा काम करना चाहते हैं।

अब तो बॉडी पेंटिंग का ट्रैंड बहुत ही बढ़ने लगा है। अगर आप ध्यान दें तो देखेंगे कि कोई भी मैच हो, वो क्रिकेट का हो या फुटबाल आदि का। अपने देश को उत्साहित करने के लिए अपने शरीर पर अपने देश से सम्बन्धित पेंटिंग किए लोग वहां बहुत ज़्यादा होंगे। नव-वर्ष, स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस आदि पर इन पेंटिंग के नमूने आपको मिल ही जायेंगे। कुछ ऐसे ही नमूने आपको रेव-पार्टियों में लड़के व लड़कियों द्वारा किए दिख ही जायेंगे। फ़ैशन के चलते आजकल के फ़ैशनेबल लड़के व लड़कियों में तो यह ट्रैंड बहुत ही बढ़ गया है। कईयों ने तो अपना पूरा का पूरा शरीर पेंट किया होता है और कइयों ने कुछेक अंग। कइयों ने सिर्फ़ टैटूस् का ही प्रयोग किया होता है।

बॉडी पेंटिंग शरीर पर होने वाले अन्य कामों से बिल्‍कुल हटकर है और फ़ैशन में निरंतर परिवर्तन के फलस्वरूप इसका स्वरूप भी निरंतर परिवर्तित होता जा रहा है।

 

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