पारिवारिक रिश्तों में मधुरता लाए

 

-सुमन

भारत में रीति-रिवाज़ों और संस्कारों को महत्ता दी जाती है। इन रीति-रिवाज़ों और संस्कारों से परिवार जुड़े हैं। परिवार टूटने से संयुक्त परिवारों में जितना प्यार अपनापन होता है एकल परिवारों में देखने को नहीं मिलता।

मगर आधुनिकता की नई दौड़ में जहां परिवार टूट रहे हैं वहीं उनमें प्यार व स्नेह की कमी भी नज़र आने लगी है। परिवार संयुक्त हो या एकल रिश्तों में दूरियां बढ़ गई हैं। यही कारण है कि एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग नज़र आते हैं। पैसे की ललक ने इंसान को क्रूर स्वभाव का बना दिया है। ज़िंदगी में जहां पैसे की अहमियत बढ़ी है वहीं दूसरी ओर पारिवारिक रिश्तों में कड़वाहट बढ़ रही है। चीज़ों और पैसे का जुनून अपनों को अपनों से दूर कर रहा है। मिस्टर शर्मा जब भी घर जाते पत्नी व बच्चों से चिढ़ कर बोलते। चाय में चीनी कम तो कभी सब्ज़ी में मिर्च तेज़ रोज़ लड़ाई-झगड़े का कारण बन जाती। धीरे-धीरे बच्चों में भी यही आदतें नज़र आने लगीं। दिन-ब-दिन माहौल ऐसा हो गया कि घर में सभी परिवार के सदस्यों का व्यवहार चिड़चिड़ा हो गया। तब शर्मा जी को महसूस हुआ कि वह ही इस सबके ज़िम्मेदार हैं। हर परिवार में ऐसी बातें होती रहती हैं। अगर शुरूआत में ही उन्हें न रोका जाए तो पारिवारिक रिश्ते तार-तार हो जाते हैं। चीज़ों और पैसे का जुनून अपनों को अपनों से दूर कर रहा है। सुबह से शाम या देर रात तक काम करने वाले लोगों की ज़िन्दगी में हंसी मज़ाक बिल्कुल ख़त्म होने से उनके व्यवहार में बदलाव हो रहा है। यही कारण है कि अपने अपनों से रूठे और नाराज़ नज़र आते हैं। घर-परिवार जिसके साथ ज़िंदगी बितानी होती है यदि उसके लिए ही समय न निकाल पाए तो आपका काम करना ही व्यर्थ हो जाता है। रिश्तों में मधुरता लाने के लिए ज़रूरी है कि अपने काम का बोझ दूसरों पर न थोपें। ऑफिस से घर आकर नर्म व्यवहार रखें। दिन भर क्या हुआ भूलकर परिवार वालों से पूछें उन्होंने दिन में क्या किया। हमेशा याद रखें घर में चिल्लाते रहने से आपकी इमेज के मुताबिक ही सब आपसे बात करेंगे। अर्थात् सबको पता होगा कि आप चिढ़ कर ही बोलेंगे तो आपसे बहुत सारी बातें छिपाई जाएंगी घर में यदि किसी बात पर आपको गुस्सा आता है तो उतना ही डांटे जितनी ज़रूरत हो। यदि पारिवारिक ज़रूरतों को पूरा करने के बावजूद आप परिवार के सदस्यों में अक्सर निंदा का विषय बनते हैं तो ज़रूरी है कि आप अपने में सुधार करें छोटी-छोटी बातों को नज़र अंदाज़ न करें और परिवार की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनको अच्छे संस्कार भी दें। घर का माहौल ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करता है। यदि नींव कच्ची हो तो कभी भी गिर सकती है यदि पक्की हो तो सालों चलती है। घर परिवार को बनाने के लिए पैसे की अहमियत के साथ-साथ अच्छे संस्कारों और आदर्शों की ओर भी ध्यान देना चाहिए।

आज के समय में ज़्यादा से ज़्यादा पैसा कमाने की होड़ में लोग अपने परिवार में कम समय बिताते हैं यही कारण है कि पारिवारिक रिश्तों में मधुरता कम कड़वाहट ज़्यादा बढ़ गई है। छोटे बच्चों की ही बात करें तो पिता के घर आते ही बच्चा पिता से प्यार करने की बजाय यह पूछता है कि आज आप मेरे लिए क्या लाए हो, या मुझे वीडियो गेम चाहिए इत्यादि। मसलन बच्चा हो या बड़ा सबको पैसा और चीज़ों से प्यार है।

रिश्तों में मधुरता लाने के लिए ज़रूरी है कि अपनों को समय ज़रूर दें। उनसे बातें करें। ऑफिस या लोगों से घर की बातें शेयर करने की बजाय घर के सदस्यों से बात करें। झूठ बोलने की आदत न डालें। बड़ी-बड़ी बातें बनाकर सुनाने की बजाय सच पर आधारित बातें करें। वास्तविकता की बात करें। बच्चों को अपने अनुभव बताएं अपने गुणों के साथ-साथ अवगुण बताने में भी गुरेज़ न करें। सुबह से शाम या देर रात तक काम करने वाले लोगों की ज़िंदगी में हंसी मज़ाक मानों ख़त्म हो गया है। व्यस्तता के कारण किसी के पास किसी के साथ बैठकर बातें करने, हंसने का समय नहीं। ऐसा बिल्कुल नहीं कि हम खुश नहीं रह सकते, दरअसल काम को बोझ समझने वाले अपने व्यवहार को ही बदल लेते हैं। यही कारण है कि अपने अपनों से रूठे रूठे और नाराज़ नज़र आते हैं। रिश्तों को मधुर बनाएं घर परिवार में अपने व्यवहार को नम्र रखें। हंसते रहने की आदत डालें और दूसरों को सिखाएं।

अपनी सोच को परिवार के साथ बांटे। अक्सर लोग अपने फ़ैसले खुद करने में विश्‍वास रखते हैं। मगर ऐसा सोचना अनुचित है। दूसरों के विचार भी आपके फ़ैसले को मज़बूत बना सकते हैं ऐसी सोच अपनानी चाहिए।

छोटी-छोटी बातों को भूलने की आदत डालनी चाहिए। अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर ताने मारने, दूसरों को नीचा दिखाने की भावना आपके रिश्तों में दूरियां बढ़ा सकती है। झूठी व अनावश्यक बातें करके दूसरों को बाेर करने की बजाय ऐसी बातें करनी चाहिए जिनसे उनके ज्ञान में वृद्धि हो। रिश्तों की मज़बूती आपके बोल-चाल, व्यवहार पर निर्भर करती है। इसलिए ज़रूरी है कि खुद को बदलें रिश्तों में मधुरता अपने आप बन जाएगी।

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