पर्स से निखारें पर्सनैलिटी

फ़ैशन की दौड़ में कोई क्यों पीछे रहे शायद आज तो हर कोई इस दौड़ में सबसे आगे निकलने को बेताब है। बात चाहे कपड़ों की हो या जूतों की या किसी अन्य वस्तु की। फ़ैशन के अधीन अपने व्यक्‍तित्व में सुधार लाया जा सकता है और इसी के अधीन आते हैं रोज़मर्रा में प्रयोग होने वाले पर्स। पर्स वह चीज़ है जिसे एक कामकाज़ी लड़की या स्त्री प्रतिदिन प्रयोग करती है और अगर ये पर्स फ़ैशनेबल और उनके पहनावे से मैचिंग हो तो इनसे उनके व्यक्‍तित्‍व में और अधिक रौब आ जाता है तथा वे सबके आकर्षण का केन्द्र बनती हैं। मॉडर्न स्त्री के लिए ख़ास जगह बना ली है मैचिंग पर्स ने। जहां पर्स आज की औरत की ज़रूरत बन गया है, वहीं इसने फ़ैशन में भी अपना स्थान सर्वोपरि बना लिया है। ग्लैमर वर्ल्ड की कुछेक महिलाएं तो हर ड्रैस से मैच करता पर्स रखती हैं। लेकिन जो महिलाएं अपने बजट ध्या‍न कर मैचिंग पर्स नहीं ले सकती, वो भी पार्टी या किसी अन्य उत्सव पर इस ओर ध्याान ज़रूर देती हैं और प्रचलित फ़ैशन को नज़र अन्दाज़ नहीं करती बल्कि समझदारी से काम लेती हैं। यदि आम जीवन में मैचिंग पर्सों का प्रयोग सुविधाजनक नहीं हो पाता, तो ऐसे पर्स प्रयोग किए जाते हैं जो हर ड्रैस के साथ सूट करें। इसके लिए काला, भूरा, क्रीम और सिल्वर व सुनहरी कुछ ऐसे रंग हैं जो ड्रैस के अनुकूल न हों तो भी ठीक लगते हैं। कई फ़ैशनेबल युवतियां तो ड्रैस के साथ कन्ट्रास्ट बना कर शोख रंगों वाले पर्सों का चुनाव करती हैं ताकि और अधिक फ़ैशनेबल दिख सकें और कुछ दिखावे की चाहवान न होने के कारण अपनी ड्रैस के साथ हल्के रंगों के कन्ट्रास्ट वाले पर्सों का ही प्रयोग करती हैं। युवतियां जहां रंगों का ध्यान करती हैं, वहीं वे पर्सों के डिज़ाइन के प्रति भी जागरूक हैं। आजकल तो इतने डिज़ाइनों के पर्स प्रचलन में हैं कि आप अपनी सुविधानुसार कोई भी पर्स चुन सकती हैं जो देखने में तो सुन्दर हो ही और आपका ज़रूरी सामान जैसे मेकअॅप का सामान, दवाइयां और मोबाइल आदि आसानी से आ जाए। सामग्री की दृष्टि से देखें तो ये पर्स आमतौर पर ज़्यादातर जूट, कपड़े, रेक्सिन और चमड़े के ही बने होते हैं। ये सामग्री कुछ सस्तीे-सी, बढ़िया और मिडियम अलग-अलग प्रकार की हो सकती है। ये तो पर्स के मूल्य पर ही निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त क्रोशिये से बुने मैचिंग पर्स भी व्यक्‍तित्व की छटा में चार चांद लगाते हैं। पर्सों का प्रयोग तो अनिवार्यता की दृष्‍टि से किया जाता है। कालेज व ऑफ़ि‍स जाने वाली युवतियां खुशनुमा आधुनिक ‍डिज़ाइन के जूट, कपड़े, रेक्सिन या चमड़े के कमर तक लटकने वाले हैंडबैग ही ज़्यादा काम में लाती हैं और दूसरी ओर अध्यापन व प्रशासनिक दायित्वों से जुड़ी महिलाएं तो सिम्पल डिज़ाइन का एकरंगा पर्स ही लेना पसंद करती हैं। नाटी और मोटी महिलाओं को जहां हैण्डिल वाले मध्यम आकार के हैंडबैग जचते हैं, वहीं लम्बे क़द वाली महिलाओं को थोड़े बड़े लटकने वाले हैंडबैग फबते हैं। चाहे पर्स की ज़रूरत हो या न हो, पर फि‍र भी आप बाहर जाते समय इसे अपने साथ ज़रूर रखती हैं। जैसे जब एक पत्‍नी अपने पति के साथ बाहर घूमने जाती है तो वहां उपयोग तो पति के पर्स का होता है पर फि‍र भी पत्‍नी फ़ैशन के चलते अपने पर्स को अपने साथ ज़रूर रखती है क्योंकि अगर उसके पास अपनी ड्रैस के साथ मैचिंग पर्स है तो वो उसे घर क्यों छोड़े। वो और अगर कुछ नहीं तो अपना रूमाल, मेकअप का सामान और मोबाइल ही उसमें रख लेती है। इस तरह मौजूदा दौर में हैंडबैग और पर्स आधुनिक महिलाओं का आवश्यक जीवन साथी बन चुका है।

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