बेटी की किताब में प्रेमपत्र

-कनु भारतीय

 

मेरे साथ वाले पड़ोसी के घर में शाम के पांच बजे चीखने-चिल्लाने व गाली-गलौच की तेज़-तेज़ आवाजें आ रही थीं। आस-पास की महिलाएं पहले तो उनके घर के बाहर इक्‍ट्ठी खड़ी रहीं फिर उनमें से अधिकतर यह कहकर बाहर से ही लौट गयीं कि यह उनके घर का मामला है। फिर भी चार-पांच औरतें हिम्मत करके अंदर चली गई। मिसेज़ सक्सेना अच्छी तरह जानती थी ये चार-पांच औरतें पूरी चुग़लख़ोर हैं।

बात को नमक-मिर्च लगाकर पूरे मोहल्ले में फैला देंगी और मुफ्‍़त में मेरी बदनामी हो जाएगी। अत: उन्होंने उन्हें बहाना बनाकर टाल दिया। दूसरे दिन वह एक प्रेमपत्र लेकर मेरे पास रोती हुई आयी और बोली आप ही कोई समाधान बताइये।

मैंने बात पूछी तो उन्होंने विस्तार से सब कुछ बता डाला। संक्षेप में उनकी परेशानी की वजह थी दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी रितु और उनके पड़ोसी का लड़का जो कि उसका सहपाठी है दोनों आपस में प्यार करने लगे थे। सुबह स्कूल जाने से पहले वह हाथ में किताब लेकर पढ़ाई का बहाना करके छत पर खड़े हो जाते और एक दूसरे को देखते रहते। और आज तो मिसेज़ सक्सेना ने उन्हें एक-दूसरे को प्रेमपत्र देते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। जब से उन्होंने वह पत्र पढ़ा था वह आग-बबूला हो गयीं और रितु पर हाथ उठा बैठी। आप ही बताइये चौदह साल, यह भी कोई उम्र होती है इश्क करने की। बुरा हो इन टी.वी.चैनलों का, जो छोटी उम्र में लड़के-लड़कियों को इश्क-मोहब्बत की शिक्षा देते हैं। मोहब्बत की आड़ में अश्‍लीलता तो परोसते ही हैं साथ ही बात न मानने पर मां-बाप से बगावत भी करना सिखाते हैं। उन्होंने अगले दिन केबल टी.वी. का कनेक्शन भी कटवा दिया। बेटी को बाप स्कूल छोड़ने जाता है तो छुट्टी होने पर मामा लेकर आता है।

मिसेज़ शर्मा के घर में भी यही समस्या है। उनकी बेटी मोनिका नौवीं कक्षा की छात्रा है। वह भी अपने सामने वाले पड़ोसी अंकल के बेटे राजू को दिल दे बैठी। दोनों घंटों छत पर हाथ में किताब लेकर एक-दूसरे को छुप-छुपकर देखते रहते। मिसेज़ शर्मा चुपचाप इस बात को नोट करती रही। वह न तो चीखी और न चिल्लाई बल्कि बार-बार मोनिका को पढ़ाई में ध्यान देने को कहा। मोनिका ने उनकी बात इस कान से सुनी और उस कान से निकाल दी। उसका रिज़ल्ट यह रहा कि वह नौंवी कक्षा में फ़ेल हो गयी।

मोनिका के फ़ेल होने पर भी मिसेज़ शर्मा ने धैर्य नहीं खोया बल्कि बेटी को प्रेम के अच्छे-बुरे पहलू के बारे में समझाया। फिर भी अपनी कही बातों पर मोनिका को आचरण न करते देखकर उन्होंने उसके सामने एक विकल्प रखा।

बी.ए.होने पर वह स्वयं उसका विवाह उसके मनपसंद साथी से कर देंगी। उस दिन से मोनिका में एक ज़बरदस्त परिर्वतन हुआ एक तो वह मां को अपनी सबसे अच्छी सहेली समझने लगी। अच्छी-बुरी हर बात उनसे खुलकर बताने लगी। दूसरा उसने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया।

मिसेज़ शर्मा की युक्‍ति काम कर गयी। वह खुश हैं भले ही उनकी बेटी ने एक साल गंवा दिया पर अब सचेत हो गयी है।

एक ओर जहां मिसेज़ सक्सेना ने बेटी को पीट-पीटकर गालियां देकर, चौकसी बढ़ाकर रीतू को अपना प्रतिद्वन्द्वी बना लिया वहीं दूसरी ओर मिसेज़ शर्मा ने धैर्य से काम लेकर अपनी सूझ-बूझ का परिचय देते हुए न सिर्फ़ मां-बेटी में एक अच्छा रिश्ता ही क़ायम किया बल्कि उसे अपने कैरियर के प्रति भी कर्त्तव्‍य बोध करा दिया।

किशोरावस्था में बेटी को मां-बाप की सबसे ज्‍़यादा ज़रूरत होती है। एक तो इस समय उसका शारी‍रिक चक्र परिवर्तित हो रहा होता है। वह शरीर की नई प्रक्रिया से गुज़रती है ऐसे में उसे मानसिक व शारीरिक परेशानी होना स्वाभाविक है।

दूसरे टीनएजर्स में सही-ग़लत का फ़ैसला करने का विवेक नहीं होता। अत: माता-पिता को चाहिए कि अपनी बेटी की आन्तरिक व बाह्म भाव अनुसार ही व्यवहार करें।

यदि कभी बेटी भटक भी जाए तो स्थिति की पूरी जांच-पड़ताल करें तथा बेटी के साथ शालीनता व समझदारी से पेश आएं। यह सही अभिभावक होने की पहचान है।

बेटी के साथ सहानुभूति व प्यार से पेश आकर ही आप उसे भटकने से बचा सकती हैं और बेटी को सही रास्ता दिखाकर मां-बेटी के स्नेहबंधन को एक मज़बूत डोरी से बांध सकती हैं। अत: बेटी की सहेली बनकर उसे अपनी अच्छी मां होने का गौरव प्रदान करें न कि उसे अपना प्रतिद्वन्द्व बनाकर शत्रु बनाएं। यही मैत्री मां-बेटी के बीच मज़बूत बंधन का कार्य करती है।

 

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