यही तो प्यार है

 

-मिलनी टण्डन रसिक प्रिया

प्यार एक ऐसा जज़्बा है जिस पर नियंत्रण नहीं हो सकता। इसके भाव या चिन्ह चेहरे पर झलक ही आते हैं। आपके व्यवहार में भी परिवर्तन आ जाता है। इसे दूसरा पक्ष समझ लेता है। यही कि आप को उससे प्यार हो गया है। आप भी इन लक्षणों को समझें जो बताते हैं कि आपको किसी से प्यार हो गया है। सच है कि जो प्यार की गिरफ़्त में आ जाता है, उसके लिए अपने मन के भाव छिपाना बहुत मुश्किल हो जाता है। प्रेम के इन लक्षणों और संकेतों को आप समझ लें। इन्हें कैसे पढ़ा, समझा और परखा जाए। तब आप आसानी से अनुभव कर लेंगे “ मुझे उससे प्यार हो गया है।”

आप प्राय: भविष्य के बारे में ख़्याल बनाते रहते हैं, कुछ न कुछ सोचते रहते हैं। उन विचारों और कल्पनाओं में आपकी वह आ जाती है। बस समझ लें, आपको उससे प्यार हो गया है।

अब आप मेल-मुलाकात के लिए चांस या अवसर को भगवान् भरोसे नहीं छोड़ते। आप पत्र या फ़ोन से इसके लिए दिन, समय, कार्यक्रम निश्‍चित कर लेते हैं। ऐसे होता है तो यह प्यार का लक्षण है।

आपके जीवन में बहुत-सी ‘प्रायरटीज़’ यानि प्रमुख कार्य हैं। जब अन्य प्रमुख कार्य पीछे चले जाएं और वह प्रमुख प्रायरटी हो जाए, तो समझो हो गया प्यार।

आप कोई कार्य पड़ने पर, कोई प्रयोजन होने पर, उसके घर जाते थे। अब ऐसा कुछ न होने पर अकार्य ही या किसी बहाने से आप उसकी निकटता पाने के लिए उसके घर चले जाते हैं जैसे कोई पुस्तक, पत्रिका, आदि देने के लिए, कुशल-क्षेम पूछने के लिए या अपनी कोई जिज्ञासा, प्रश्‍न या समस्या लेकर जो आप पत्र या फ़ोन से पूछ सकते थे, पर आपके क़दम उसके घर जाने को उठ जाते हैं। हां, यह प्यार का लक्षण ही तो है।

आप के अपने सिद्धांत और उसूल हैं। आप कभी उनसे पीछे नहीं हटते और न कोई कम्प्रोमाइज़ करते हैं अपने आदर्श या नियम से। पर उसके लिए आप कोई समझौता शीघ्र कर लेते हैं। अपने नियम व आदर्श से भी पीछे हट जाते हैं। इसमें कोई हठ, परहेज़ या संकोच आप नहीं करते। आपके नियम-फ़ायदे दूसरों के लिए तो रहते हैं, पर ‘वह’ अपवाद बन जाती है। अपनी नीतियों से आपका यह विचलन क्यों? इसलिए कि आप उसे प्यार करने लगे हैं।

आप अपनी योजनाओं में उसे शामिल कर लेते हैं। उसे उसकी योजनाओं के बारे में पूछते हैं और सलाह देते हैं। आप एक सांझेदारी की ज़िन्दगी चाहते हैं, उसके साथ। हां, इसलिए कि आप उसे प्यार करते हैं और जीवन में निकट से निकटतम हो जाने की लालसा से भरपूर हैं आप।

आपके परिचय और मित्रता में कई हैं। सबसे सम्पर्क चलते हैं। पर धीरे-धीरे क्या होता है कि कइयों से सम्पर्क ढीले हो जाते हैं। पत्र व फ़ोन बहुत कम हो जाते है। बस एक से बने रहते हैं या बढ़ जाते हैं। औरों के बजाय आप उसे अधिक पत्र लिखने लगते हैं, बहुत अधिक फोन करने लगते हैं। यथासंभव मिलना भी अधिक हो जाता है या ऐसी इच्छा प्रबल हो जाती है, उससे बातें करना, साथ समय व्यतीत करना आपको अच्छा लगता है, आप उसकी रुचियों में शामिल हो जाते हैं, आप उसके लिए अपनी योजनाएं, अपने कार्यक्रम बदल देते हैं। अपनी रुचियों में उसे शामिल करना चाहते हैं या शामिल कर लेते हैं, आप उसके लिए स्वप्न देखते हैं, वह आपके सपनों में प्रवेश कर जाती है, आप उसकी दिनचर्या के प्रति उत्सुक रहते हैं, आप सांझा प्रोग्राम बनाते हैं, ये सब लक्षण हैं कि आप उसके प्रेम में बंदी हो चुके हैं। तभी तो आप दूसरों पर अब ध्यान नहीं देते, हालांकि बहुत सी हैं जो उससे ज़्यादा सुन्दर और आकर्षक हैं। वे आप को कमतर लगने लगती हैं, अपनी ‘वह’ सर्वोपरी, सरताज! आपका उससे बहुत खूब तालमेल, सामंजस्य बैठ चुका है। वह आपके ‘दिल की रानी’, बन चुकी है।

पुरुष में स्त्री के प्रति प्रेम-प्यार के जो लक्षण बताए गए हैं, वही लक्षण किसी स्त्री में भी होते हैं या देखे जा सकते हैं या वह स्वयं अपने में उन्हें देख सकती है, जब उसे किसी पुरुष से प्यार हो जाता है।