टूटती ज़ंजीरें

जो लिखा है वही होना है तो फिर किस बात का रोना है। क़िस्मत का रोना कमज़ोर आदमी की अलामतें हैं। यदि उस लिखने वाले के ज़िम्मेे ही सब कुछ छोड़ दिया जाए तो हमारे करने को तो कुछ बचेगा ही नहीं।

तदबीर से तक़दीर बनती है हमेशा, इक बार आगे तो बढ़ के देख।

आज़मा ले इक बार अपने हौसले को, आसमान की इक बार तमन्ना तो करके देख।

हमारा ख़्वाब है-

हर पुत्री को पुत्रिका बनाने का,हर जननी को उसका रुतबा दिलाने का,
प्रत्येक पत्नी को उसका अपना ख़्वाब मिल पाने का।

इसके अलावा हमने तमन्ना की है हर नारी किसी की पुत्री, किसी की पत्नी या किसी की मां बनने के अलावा भी बहुत कुछ बने और उसके हौसले उसके अपने घर से बुलंद हों। अपनी खुद की शख्सियत बनाने के लिए उसे दुनिया से पहले घर में जद्दोजेहद न करनी पड़े। उसे वो सब अधिकार मिल पाएं जिनकी वो हक़दार है। उसे मुट्ठी भर आसमां नहीं अपने हिस्से का पूरा आकाश चाहिए।

ऐसा नहीं कि हमारे ख़्वाब की हक़ीक़त में कोई ज़मीं नहीं। हम अपने रास्ते तलाश चुके हैं और हम वाक़ई बढ़ चुके हैं, अपनी मंज़िल की ओर।

अजी आपने तो बस हुस्न की अदाएं ही देखी हैं।
इनके हौसलों को पहचाना ही कहां है।
ये वो ताक़त है जो सल्तनतें हिला देती है।

ये सत्य है कि आज भी हमारे देश में औरत के कष्ट के दिन अभी बाक़ी हैं। लेकिन अब वो ख्वाहिशें करने लगी है। अब वो नहीं चाहती दबी घुटी सिसकियां, जहां खुलकर रोने तक की छूट न हो। आसमान में उड़ने की चाह है। कुछ कर गुज़रना चाहती है। बुलंद इरादे लेकर हर ख़्वाब की तामीर की जा सकती है। उसने अकसर अपने साहस और कौशल से दुनिया को अचंभित किया है। जब वो कुछ करने की ठान लेती है तो पूरा कर ही लेती है।

लेकिन शर्मनाक तथ्य है कि इन्दिरा गांधी, किरण बेदी के इस देश में आज भी औरत अपने अधिकारों से वंचित है। आज भी उसे अधिकार दिए नहीं जा रहे और उसके अधिकार छीनने वाले खुद उसके अपने ही होते हैं। इसके लिए सबसे पहले तो आवश्यकता है औरत अपने बारे में अपने अधिकारों को जान पाए और पूरी तरह से यह स्वीेकार करे कि वाक़ई ये मेरे अधिकार हैं।

ये आसमान, ये पाताल, ये पहाड़, ये शांत-सी धरतियां, ये सूरज-चांद-सितारे ये सब गवाही देते हैं, दु‍हाई देते हैं – ये सब तेरा है, ये सब तेरा है। ये सब तो अब खुद तुम पर मुनहसिर है कि तुम ऊंचाइयों को क़दमों तले ला सकती हो या नहीं, आसमानों को छू पाती हो या नहीं, चुनौतियों का सामना करने का साहस कर सकती हो या नहीं।

-सिमरन

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