फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी

fir bhi dil hai hindustani                                                                                                                                                                                                                         -प्रो.शामलाल कौशल

 यह एक आम बात है कि कोई हमारी प्रशंसा करे या ना करे लेकिन हम अपने मुंह से मियां मिठ्ठू बने बिना बाज़ नहीं आते। जैसे भारत दुनिया में सर्वश्रेष्‍ठ है। हम घर आये मेहमान को भगवान समझते हैं। खुद भूखे रहकर भी पड़ोसी के भूखे बच्चे को पेट भर खाना खिलाते हैं, सर्वे भवन्तु सुखिन:, वसुधैव कुटुम्बकम आदि। हम जानते हैं आजकल इन बातों में कोई दम नहीं। लेकिन इसके बावजूद भी हम लकीर के फ़कीर बने हुए हैं। आखिरकार हम श्रीराम, युधिष्‍ठर, महात्मा बुद्ध, गांधी के महान भारत के निवासी हैं। हमारा दिल बहुत नर्म है। हमें परमात्मा पर बहुत भरोसा है। कोई हमारा कुछ भी क्यों न बिगाड़ जाये, हम बहुत जल्दी भूलकर उसे गले लगा लेते हैं। हमारा दिल खालिस हिन्दुस्तानी है। इसमें मिलावट हो ही नहीं सकती। इतिहास गवाह है कि मोहम्मद गज़नवी लूटमार करता हुआ जब सोमनाथ के मंदिर तक जा पहुंचा, उसने हज़ारों मासूम भारतीयों को मौत के घाट उतार दिया, हमने उसका बिल्कुल विरोध नहीं किया क्योंकि हमें भरोसा था कि भगवान हमारी रक्षा करने ज़रूर आयेंगे। क्योंकि गीता से हमने सीख रखा है कि जब धर्म की ग्लानि होती है परमात्मा धर्मात्मा लोगों की रक्षा के लिए तथा पापियों का नाश करने के लिए अवतार लेता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उस समय अगर प्रत्येक भारतीय एक-एक पत्थर उठाकर भी गज़नवी की सेना पर फेंकता, न केवल सोमनाथ का मंदिर लूटे जाने से बच जाता बल्कि आगे को कोई विदेशी आक्रमणकारी भारत की तरफ़ मुंह करने की हिम्मत भी नहीं करता। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया क्योंकि यह हमारे हिन्दुस्तानी दिल की फितरत के मुताबिक़ है ही नहीं।

अगर हम इतिहास से कुछ ना भी सीखें तो भी आज़ादी के बाद जो हमारी आये दिन दुर्गति हो रही है उसके लिए भी हमारा हिन्दुस्तानी दिल बधाई का पात्र है जो कि किसी तरह से पसीजता भी नहीं। पाकिस्तान का निर्माण भारत माता के विभाजन के बाद हुआ। इधर से उधर तथा उधर से इधर आने जाने में करोड़ों शरणार्थियों का कत्लेआम हुआ, बहू बेटियों की इज़्ज़त आबरू के साथ खिलवाड़ हुआ, करोड़ों रुपये की सम्पत्ति बरबाद हुई, पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला करके उसके एक हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। लेकिन उसके बदले हमें क्या मिला – पाकिस्तान की ईर्ष्या, शत्रुता तथा dil hai hindustani2विरोध। हमने हर बार उसके हितों के लिए कुछ ना कुछ किया लेकिन उसने भारत में तोड़ फोड़ करने के लिये अपने यहां आतंकवादियों को प्रशिक्षण देकर भेजने का सिलसिला जारी रखा। बेशक इससे उसका अपना भी सत्यानाश हो गया। पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित आतंकवादियों ने मुंबई में हमला करके 150 से ज़्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया। एक जीवित आतंकवादी अजमल कसाब को हम तो अति सुरक्षित जेल में रखकर उसको बिरयानी खिलाते रहे तथा उसकी सेहत का ध्यान रखते रहे। जबकि दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी सैनिक कश्मीर में हमारी सीमा पार करके हमारे दो सैनिकों के सिर काट कर ले गये तथा एक भारतीय कैदी सरबजीत सिंह को बम धमाकों के झूठे केस में फंसाकर उसे लाहौर की लखपतराय जेल में यातनाएं देते रहे तथा उसी जेल में दो कैदियों ने सरबजीत सिंह पर घातक हमला किया और उसकी मृत्यु हो गई। जबकि हमने उम्र कैद काट रहे एक पाकिस्तानी क़ैदी चिश्ती को रिहा करके सादर पाकिस्तान भेज दिया। पाकिस्तान भारतीय कैदियों पर ज़ुल्म ढाह रहा है और हम मानवाधिकार के नियमों के अनुसार उसका बाल भी बांका नहीं होने दे रहे क्योंकि हमारा हिन्दुस्तानी दिल जैसे को तैसा करने की अनुमति ही नहीं देता।

इटली के एक जहाज़ के दो रक्षकों ने हमारे दो मछुआरों को मार गिराया। कुछ दिन तक वह हमारी जेल में रहे फिर इटली के दूत द्वारा आश्‍वासन दिये जाने के बाद वे अपने देश में होने वाले चुनावों में मतदान करने के लिए चले गये और वापिस आने से इनकार कर दिया। आख़िरकार हमारी सरकार ने इटली सरकार को इस बात के लिए मना लिया कि इन दोनों अपराधियों को वापिस भारत भेज दिया जाए और उन्हें किसी भी हालत में फांसी नहीं दी जायेगी। दुनिया में शायद भारत एक मात्र ऐसा देश होगा जो कि मुक़दमा चलने से पहले हत्यारों को अभयदान देता हो। क्या ऐसा हिन्दुस्तानी दिल कहीं और मिलेगा?

हमने चीन के साथ अच्छे पड़ोसी वाले सम्बन्ध बनाने की कोशिश की। हमारे प्रथम प्रधानमंत्री, पं.जवाहर लाल नेहरू ने चीन के साथ पंचशील सिद्धांत पर हस्ताक्षर किये तथा ‘हिन्दी चीनी भाई भाई’ को बढ़ावा दिया। लेकिन उसका जवाब चीन ने 1962 में भारत पर आक्रमण करके तथा हमारी 90 हज़ार कि.मी. ज़मीन पर कब्ज़ा करके दिया। वह जम्मू कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानकर अपने यहां आने के लिए एक नत्थी वीज़ा देता है, अरुणाचल प्रदेश को अपना इलाका मानता है, ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनवाकर आने वाले जल को रोकता है, लदाख में 19 कि.मी. प्रवेश करके अपनी चौकियां बनाता है, पाकिस्तान के साथ मिलकर हमें परेशान करता है फिर भी हम उसके ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं करके उनके साथ खूब व्यापार बढ़ा रहे है क्योंकि हमारा हिन्दुस्तानी दिल शांति प्रिय है।

हम अमेरिका और इंग्लैंड को अपने अच्छे मित्र देश समझने लगे हैं। लेकिन जब कभी हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, प्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख खां तथा उ.प्र. के मंत्री रहे आज़म खां को अमेरिका जाना पड़ा, सुरक्षा के नाम पर इनके तथा अन्य भारतीयों के कपड़े उतरवाकर तलाशी लेते रहे। यही कुछ इंग्लैंड ने भी हमारे साथ किया लेकिन जब कभी भी अमेरिका इंग्लैंड याdil hai hindustani1 किसी अन्य देश का कोई मेहमान आता है तो ‘अतिथि देवो: भव’ मानकर हम दिल के दरवाज़े खोल कर उसका स्वागत करते हैं। तालाशी का सवाल नहीं। कभी श्रीलंका तथा कभी मालदीव हमें आंखे दिखा जाते हैं और हम शालीनता दिखाते हैं। वह भी हमारी दरिया दिली है। इस प्रकार के हमारे हिन्दुस्तानी दिल की अन्तराष्‍ट्रीय स्तर पर ज़रूर प्रशंसा होनी चाहिये।

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