सपनों का राजकुमार और सपनों की राजकुमारी

sapno ka rajkumar file
-दीपक कुमार गर्ग

शादी से पहले लड़के और लड़की दोनों की ओर से एक दूसरे को देखने की रस्म हमारे समाज में एक रिवाज़ बन चुकी है। परंतु कई बार देखने-दिखाने के चक्कर में केवल बाहरी रंग रूप से प्रभावित होकर ग़लत फ़ैसले भी ले लिए जाते हैं। पसंद न आने पर मना करना तो पहली शर्त ही होती है। ऐसे हालात में लड़का-लड़की अक्सर तनाव या हीन भावना के शिकार हो जाते हैं। परंतु यदि लड़का या लड़की एक दूसरे को देखने से पहले कुछ बातों का ध्यान रख लें तो न केवल किसी असुविधा व परेशानी से बचा जा सकता है बल्कि लड़के या लड़की की तरफ़ से एक दूसरे को विवाह से पहले देखने के अनुभव में हां या ना दोनों ही स्थितियां सुखदायी बन सकती हैं।

लड़की को ऐसे वक़्त में सादगी की तरफ़ ज़्यादा ध्यान रखना चाहिए न कि शो पीस के रूप में अपने आप को पेश करने की कोशिश करनी चाहिए।

आजकल की लड़कियां पढ़ी-लिखी और समझदार होती हैं। इसलिए उन्हें अपने जीवन साथी के चरित्र, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई, पारिवारिक रूचियां और बाकी गुणों के बारे में जानने का पूरा हक़ है। कोई भी जानकारी प्राप्त़ करने में संकोच करना समझदारी नहीं होगी।

ज़रूरी नहीं कि जो लड़का लड़की को देखने के लिए आया है वह लड़की के सपनों का राजकुमार ही हो। कई लड़कियां अपने जीवन साथी के बारे में अपनी बहन या सहेली के पति जैसी तस्वीर अपने दिमाग़ में बैठा लेती है। इसी प्रकार लड़के भी अपनी सपनों की राजकुमारी की तस्वीर अपनी किसी भाभी या जानकार लड़की जैसी अपने दिमाग़ में बैठा लेते है। ध्यान रखें शादी के पहले या शादी के बाद अपने जीवन साथी की तुलना किसी और से करना सुखद नहीं होता है। अक्सर लड़के या लड़कियां “हम आपके हैं कौन” जैसी फ़िल्मों से प्रभावित हो जाते हैं और अपने जीवन साथी के रूप में किसी फ़िल्मी पात्र जैसी तस्वीर अपने मन में बैठा लेते हैं।

परन्तु असल में जीवन की सच्चाइयां फ़िल्मों में दिखाई सच्चाइयों से बहुत दूर होती हैं। यदि असली जहांगीर आकर मुग़ले-आज़म की अनारकली को देख लेता तब वह तुरंत असली अनारकली को छोड़कर मधुवाला को ही अपने दिल की रानी बना लेता। जे.पी.दत्ता ने उमरावजान के रूप में  विश्‍व सुंदरी ऐश्‍वर्या राय को पेश कर दिया। परंतु नॉवल के अनुसार सच्चाई यह है कि यदि अमीरन विश्‍व सुंदरी होती तो वह उमरावजान नहीं किसी नवाब की महारानी होती।

लड़कियों को भी यह जान लेना चाहिए कि फ़िल्मों में जो दिखाया जाता है असल जीवन में लड़के के लिए वह करना स्वाभाविक नहीं होता है। इस लिए किसी फ़िल्मी कलाकार की असल ज़िंदगी में झांकने की कोशिश करें। सूरत से सीरत अच्छी होनी चाहिए, हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। इसलिए लड़के और लड़की को चाहिए रंग रूप की जगह एक दूसरे के गुणों को जानने को पहल दें।

माता-पिता को भी चाहिए कि वे अपने लड़के या लड़की के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर तारीफ़ न करें क्योंकि बाद में जब हक़ीक़त सामने आ जाती है तब यह झूठ उनकी औलाद के लिए दुखदायी ही साबित होता है।

यदि लड़के वाले आपकी हैसियत से बढ़कर मांग कर रहे हों तो लड़की को चाहिए कि वह खुद ही उस रिश्ते से मना कर देवे। अच्छे रिश्ते के चक्कर में कभी भी कर्ज़ लेकर या कोई और ग़लत क़दम उठाकर लड़के वालों की मांगे पूरी नहीं करनी चाहिए।

माता-पिता को चाहिए कि वह अपनी औलाद के लिए जीवनसाथी चुनते समय उसकी इच्छा और राय को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़कर अपनी औलाद की उम्र, शिक्षा और यदि कोई बीमारी हो तो पहले ही ईमानदारी से बता देवें। कोई भी छुपाई हुई बात बाद में परेशानी बन सकती है। लड़का-लड़की को विवाह पक्का करने से पहले कुछ समय अकेले में मिलने का मौक़ा दिया जाना चाहिए ताकि दोनों एक दूसरे को समझ सकें। अपने से अमीर और ऊंची हैसियत वालों से रिश्ता करने से आमतौर पर बचना चाहिए।

लड़की को चाहिए कि यदि उसे अपने भावी जीवनसाथी के बारे में या ससुराल के बारे में कोई शंका या एतराज़ है तो खुल कर अपने माता-पिता से सलाह मशविरा करे, क्योंकि उस घर में उसने अपनी बाकी ज़िंदगी बितानी है। किसी भी ग़लत रिश्ते का कुप्रभाव लड़के एवं लड़की दोनों पर पड़ता है। लड़की को चाहिए कि वह पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ हर काम में अपनी योग्यता को बढ़ाने की कोशिश करती रहे। चाहे मायके में नौकर-चाकर काम करते हो परंतु ससुराल में नौकरी करने की पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए। यदि लड़की हर काम में योग्य होगी तो विवाह के बाद किसी भी अच्छी-बुरी स्थिती का सामना आसानी से कर सकती है।

कई बार लड़के, लड़की को देखने के मौक़े पर उस पर इमोशनल दबाव डालकर शारीरिक संबंध बना लेते हैं। कई बार तो ब्लैकमेल भी करते हैं कि नहीं तो मैं तुमको ना पसंद कर दूंगा। लड़की को लड़के की ऐसी किसी भी मांग का बेहद कठोरता से जवाब देना चाहिए और किसी भी प्रकार के भय को त्याग देना चाहिए। ज़रूरी नहीं है कि लड़का तो आपको पसंद कर चुका है लेकिन किसी और बात के कारण भी रिश्ता बाद में टूट सकता है। फिर लड़की के लिए ऐसी ग़लत स्थिती का सामना करना मुश्किल हो जाएगा।

लड़के वालों को समझ लेना चाहिए कि यदि लड़की अपने साथ ज़्यादा दहेज़ लेकर आती है तो वह पैसे के ज़ोर से ग़ुलाम बनाने की कोशिश भी ज़रूर करेगी। कई बार दहेज़ में आए सामान के रखरखाव में आने वाला ख़र्च आपकी हैसियत से भारी पड़ जाता है।

यदि कोई पक्ष किसी कारण रिश्ते को स्वीकार न करे तो दूसरे पक्ष को निराश होने की बजाए यह मानकर चलना चाहिए कि हमारे लिए अच्छे रिश्तों की कोई कमी नहीं है। बिना किसी ख़ास कारण के रिश्ते के लिए मना नहीं करना चाहिए। यदि रिश्ता अच्छा है और आपके अनुकूल है तो अच्छे रिश्ते की उम्मीद में उसे छोड़े नहीं।

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