तनावः सेक्स का दुश्मन

– सुनीता सिंह

प्रकाश पटेल ने जब अपनी दिनचर्या पर ध्यान दिया तो वह अंदर तक घृणा से भर गया। उसकी पत्‍नी के चिकित्सक ने उसे अपने कार्यक्रम में सेक्स को भी जोड़ने के लिए कहा था क्योंकि उनकी शादी को 4 साल हो गए थे और उनका कोई बच्चा भी नहीं था। ऐसा इसलिए था क्योंकि वो हमेशा अपने निर्धारित कार्यक्रमानुसार ही चलता था।

उसके पास सेक्स के लिए समय नहीं था। जैसे-जैसे वो सफल हो रहा था उस पर अपनी क्षमता दिखाने का दबाव बढ़ता ही जा रहा था। इस कारण उसे थकान हो जाती और वो सेक्स की बजाए सोना पसन्द करता था। आज पहली बार उसे लगा कि उसने कभी अपने व अपनी पत्‍नी के साथ न्याय नहीं किया।

कुछ समय से देखा जा रहा है कि स्त्री-पुरुष सेक्स की बजाए सोना पसंद करते हैं क्योंकि उन पर थकान हावी रहती है। उनकी यह समस्या बढ़ती जा रही है वे समझ नहीं पा रहे कि सोते समय सेक्स कैसे करें। दोष किसको दिया जाये? मल्टीनेशनल कम्पनी के कॉल सेंटर व आई.टी. बूम ने पुरुषों की एक ऐसी प्रजाति विकसित कर दी है जो कि उत्साहहीन प्रेमी हैं। उनके कार्यक्रमों की भीड़-भाड़ में से सेक्स काटकर वर्क़ आवर, तनाव, यात्राएं आदि शब्द जुड़ गए हैं जिससे उनकी पर्सनल लाइफ भी अछूती नहीं रही है।

1950 की अपेक्षा हमारा खाली समय अब लगभग 40 प्रतिशत कम हो गया है। हम अब समय प्रबन्धन के फन्दे में बंधे रहते हैं और एक नई परेशानी से भी जूझ रहे हैं वह है “समय की कमी।” जब भी घर, काम व सेक्स को बैलेंस करने की बात आती है तो या तो सेक्स को नज़रअंदाज़ कर देते हैं या फिर सबसे नीचे कर देते हैं। वैसे भी कामकाजी जोड़ों के पास समय की भारी कमी रहती है, यह एक गंभीर सेक्स समस्या है। तनाव स्त्री-पुरुष दोनों की ही सेक्सुअल इच्छा को समाप्‍त कर रहा है। यह मानव के यौन जीवन का अदृश्य दुश्मन है। थकावट व तनाव यौन उत्तेजना को एक तरह से प्रतिबंधित कर रहे हैं। अगर देखा जाए तो केवल शारीरिक थकावट ही दोषी नहीं है बल्कि मानसिक थकावट भी उतनी ही दोषी है।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि सेक्स को कभी भी किसी खाली दिन का आख़िरी काम न मानें बल्कि इसे जीवन व स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण अंग मानें क्योंकि सन्तुष्‍ट‍िदायक सेक्स आपको शारीरिक व मानसिक शक्‍त‍ि तो प्रदान करेगा ही साथ ही एक आराम भरी रात तथा एक प्यारी सुबह भी देगा।

इच्छानुरूप सेक्स केवल फ़िल्मों में ही नहीं होता बल्कि इसे आप हक़ीक़त में भी बदल सकते हैं। इसके लिए आपको सेक्स के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्‍त करनी होगी तथा अपने अन्दर सेक्स की चाहत पैदा करनी होगी।

सेक्स को नज़र अंदाज़ न करें

शराब पीने से भी उत्साह में कमी आती है तथा धूम्रपान से भी ऐसा ही होता है। वैसे तो रात में सोते समय हल्का खाना लेना चाहिए और यह एक बेहतर तरीक़ा भी है। अगर आप सेक्स के समय भारीपन नहीं चाहते तो सेक्स के बाद ही खाना खाएं या फिर हल्का खाना खाने के दो घंटे बाद सेक्स क्रिया करें तथा सेक्स क्रिया से निवृत्त होने के बाद हल्का मीठा डाल कर गुनगुना दूध पीएं इससे आपको अच्छी नींद आयेगी तथा सुबह आप तरो-ताज़ा उठेंगे और पूरा दिन अपने कार्यों का संचालन सुचारू रूप से करेंगे।

30 वर्षीय अनीता अपनी आँखों में आँसुओं को समेटे हुए मदद लेने के लिए डॉक्टर के पास गई। उसका कहना था कि पिछले 6 साल से पति उससे प्यार नहीं करता। उसने बताया कि वह उसके साथ सेक्स करने के बजाए केवल सोना पसंद करता है।

आज औरत व आदमी सभी की सेक्स व इससे जुड़े रोगों व व्याधियों के बारे में सोच बदल चुकी है। एक डॉक्टर के अनुसार 20 साल पहले मेरे पास आने वाले सभी 10 मरीज़ पुरुष थे आज 10 में से 4 मरीज़ स्त्रियाँ हैं। जब डॉक्टर ने अनीता से उसके पति को भी साथ लाने के लिए कहा तो वह खुद भी इस बात की इच्छुक थी। डॉक्टर ने उसके पति से बात की तथा उसे शराब, धूम्रपान आदि से दूर रहने तथा हर काम का कार्यक्रम बनाने की सलाह दी, जिसमें सेक्स का भी महत्वपूर्ण स्थान हो। डॉक्टर की उचित सलाह व मामूली चिकित्सा के बाद वह अपनी पत्‍नी से भरपूर प्यार व सेक्स करने लगा। पूर्व की भाँति अब महिलाएं घुट-घुट कर जीना नहीं चाहतीं। अब वे केवल शारीरिक संबंध ही नहीं चाहती बल्कि भावनात्मक रिश्ता भी चाहती हैं। यह एक रोचक तथ्य है कि अब औरतें भी प्रोएक्टिव हो रही हैं वे भी सेक्सुअल आनंद की बराबर मांग कर रही हैं।

मीडिया द्वारा नए-नए तरीक़ों की ख़बरें पाकर लोग डॉक्टरों के पास आ रहे हैं। आजकल के खास मुद्दे स्त्री यौन आवेग हीनता, सेक्सु्अल उत्साहहीनता या फिर कभी-कभी होने वाला सेक्स है। अब स्त्री-पुरुष सेक्स ही नहीं बल्कि बैटर सेक्स चाहते हैं। इसमें अधेड़ व उम्रदराज़ सभी तरह के मरीज़ हैं। आश्‍चर्यजनक तो यह है कि हर मरीज़ अपने साथ अपने साथी को भी लाना चाहता है। आजतक जिस सेक्सु अल आनंद को एक गुप्‍त विषय माना जा रहा था आज हर व्यक्‍त‍ि उस पर बात करने को इच्छुक है।

कुछ खास है ज़िंदगी में

सेक्स नज़रअंदाज करने की चीज़ नहीं है।

इसे जीवन व स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण अंग मानें।

तनाव यौन जीवन का छिपा हुआ दुश्मन है इससे बाहर निकलें।

हर काम का कार्यक्रम बनाएं, जिसमें सेक्स की भी जगह हो।

संतुष्‍टिदायक सेक्स शारीरिक व मानसिक शक्‍त‍ि देता है, साथ ही एक प्यारी-सी सुबह भी।


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