सुखी दाम्पत्य जीवन आपसी तनाव मिटाएं

-सुमन कुमारी

दाम्पत्य जीवन में मन-मुटाव तो होता ही रहता है। कुछ लोग अपनी गृहस्थी को अपने ही हाथों ख़त्म कर लेते हैं। पति-पत्‍नी को आपसी बातों को घर के अंदर ही निपटाना चाहिए।

पति और पत्‍नी में तनाव बढ़ने के दो कारण आमतौर पर देखे जाते हैं। इनमें से एक तो है पत्‍नी का पति पर शक करना और दूसरा है पति का ऑफ़िस से घर आकर पत्‍नी पर झुंझलाते रहना। ऐसी बातों से तनाव बढ़ाने की बजाए इन बातों को सूझ-बूझ से निपटाया जा सकता है।

पत्‍नी को यदि पति की किसी बात पर शक है तो शक को दूर करने के लिए पति से बात करनी चाहिए न कि आस-पड़ोस में। कई बार बेवजह का शक ही मुहल्ले में व्यक्‍त‍ि की पहचान को संकट में डाल सकता है। कुशल दाम्पत्य जीवन जीने के लिए ज़रूरी है कि एक-दूसरे को समझा जाए, भरोसा किया जाए।

पति- पत्‍नी में अक्सर लड़ाई-झगड़े का कारण होता है पति का ऑफ़िस से घर आकर पत्‍नी से गुस्से में बात करना बेवजह डाँटना। माना कि ऑफ़िस में काम करना पड़ता है पर इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं कि खुद की परेशानी या थकावट को उतारने के लिए किसी दूसरे से झगड़ा किया जाए। यही मामूली झगड़े कई बार रिश्तों को टूटने की कगार पर ला खड़ा करते हैं।

गृहस्थी चलाने के लिए पति-पत्‍नी दोनों का सहयोग अनिवार्य होता है। ये दोनों ही घर को अच्छे ढंग से चला सकते हैं। समाज में अपनी पहचान बना सकते हैं। कुछ दाम्पत्य तो मिसाल बन जाते हैं। जिनकी गली-मुहल्ले में बातें होती हैं – अच्छे व्यवहार के कारण। कुछ अपने ग़लत व्यवहार के कारण पहचाने जाते हैं।

अपनी गृहस्थी को खुशगवार बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। एक दूसरे के अवगुणों को देखने की चेष्‍टा नहीं करनी चाहिए। हर व्‍यक्‍त‍ि का स्वभाव एक जैसा नहीं होता। हर किसी का व्यवहार, काम करने का ढंग अलग होता है। इसलिए किसी एक की ग़लती पर उसे सबके सामने बताने की बजाए, सबमें खड़े होकर गुस्से में डांटने के स्वर में कहने की बजाए प्यार से समझाना चाहिए क्योंकि इंसान ग़लतियों का पुतला है जो हर पल सीखता है, ग़लतियाँ करता है। सीखने की प्रवृत्ति तो सारी ज़िंदगी चलती है। हर पल इंसान कुछ नया सीखता है। पति चाहता है कि पत्‍नी उसके अनुसार काम करे, पत्‍नी चाहती है कि उसका पति ठीक वैसा करे जैसा वो सोचती है। सोच व ज़िंदगी में बहुत फ़र्क़ है। हर व्‍यक्‍त‍ि की अपनी रुचि व पसंद होती है। जिसके मुताबिक़ उन्हें काम अच्छा लगता है।

आपसी पति-पत्‍नी की बात को मेहमानों के सामने करके वो अपनी अंतरंगता में उनकी दख़लअंदाज़ी डाल लेते हैं। छोटी-सी बात को बड़ा करने में देर नहीं लगती। मसलन पति-पत्‍नी का दाम्पत्य जीवन तभी सुखी हो सकता है जब वह आपसी बातों का खुद ही निपटारा करें।

किसी पार्टी या शादी में जाते समय अपना मूड ठीक रखना चाहिए। कई बार पति-पत्‍नी में किसी बात को लेकर तनाव होता है जो पार्टी में भी चलता रहता है। आपस में खिंचे-खिंचे रहने से खुद मानसिक तौर पर ग्रस्त रहते हैं और लोगों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। ये मन-मुटाव तो चलते ही रहते हैं। छोटी-छोटी बातों को लेकर लोगों के सामने आपसी रिश्ते को तनाव ग्रस्त दिखाना उचित नहीं।

सुखी दाम्पत्य जीवन बिताने के लिए पतिपत्‍नी को सूझ–बूझ से काम लेना चाहिए। किसी बात को दिल में छुपाए रखना व दूसरे को बातें सुनाते रहना कदापि उचित नहीं, बल्कि पति-पत्‍नी के रिश्ते में ऐसा खुलापन होना चाहिए कि वे एक दूसरे से बेझिझक बात कर सकें।

क्रोध में आकर ऐसी कोई बात नहीं करनी चाहिए जिस पर बाद में पछताना पड़े। क्रोध इंसान को तबाह कर देता है जब तक समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। मां-बाप की बातों का बच्चों पर असर बहुत जल्दी होता है इसलिए अपने रिश्ते को तनाव रहित रखें, अच्छे व्‍यक्‍त‍ित्व वाले लोग ही समाज में अपनी पहचान बना पाते हैं।

इस तरह यदि छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखा जाए तो हम बेवजह बढ़ते तनाव को रोक सकते हैं। दाम्पत्य जीवन प्यार व सहयोग भरपूर होना चाहिए। सुखी दाम्पत्य जीवन जीने वाले लोग ही सुखी समाज की बुनियाद होते हैं और समाज में अपना योगदान बखूबी निभाते हैं।

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