शादी के बाद क्यों महत्त्व देती हैं महिलाएं नौकरी को

-आकाश पाठक

आधुनिक समाज में क़दम-दर-क़दम हो रही प्रगति से जहां महिलाओं को विचारों में, घूमने-फिरने में आज़ादी मिली है, वहीं यह तथ्य भी स्पष्‍ट होता जा रहा है कि महिलाएं शादी के बाद भी नौकरी को प्राथमिकता देती हैं या दे रही हैं। भले ही उनके पतियों की मासिक आय एवं पारिवारिक परिस्थितियां सुदृढ़ क्यों न हों। मगर आधुनिक नारी स्वयं को नौकरी या सर्विस के मोहपाश से दूर नहीं रख पा रही है।

यह तथ्य भी जग-ज़ाहिर है कि यदि पति और पत्‍नी दोनों ही नौकरी में अधिक मसरूफ़ रहते हैं तो दाम्पत्य जीवन में नीरसता, कड़वाहट पैदा हो जाती है। यह सही है कि कई बार देखा गया है कि परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को देखकर कुछ पति-पत्‍नी यह फ़ैसला करते हैं कि उन दोनों को मिलकर घर की ज़िम्मेदारी उठानी चाहिए। दोनों की विचार-शैली मिलने पर पत्‍नी सर्विस करने लगती है, लेकिन ऐसा भी देखा गया है कि परेशानियां घटने की बजाय बढ़ने लगती हैं, मसलन पति-पत्‍नी अपने लिए या बच्चों के लिए समय निकाल नहीं पाते हैं। उस समय परिवार में तनाव का माहौल पनपने लगता है। ऐसे तनावग्रस्त माहौल को पनपते देख पति या पत्‍नी यह राय रखते हैं कि वह नौकरी छोड़ दे या छोड़ रही है। और उस समय बहुत विकट परिस्थिति खड़ी हो जाती है जब दोनों में से किसी एक के विचार मेल नहीं खाते, नतीजा दाम्पत्य जीवन में खटास।

Importance of Work File Image 1अहम सवाल सामने आता है कि आख़िर पत्‍नियां शादी के बाद नौकरी को क्यों महत्त्व देती हैं। एक विश्‍लेषण के अनुसार महिलाएं शादी के बाद नौकरी करने के लिए लालायित रहती हैं। बहुत से मनोचिकित्सकों का मानना है कि कई बार पति की बराबरी की ख़ातिर, पत्‍नियां नौकरी को अधिक महत्त्व देती हैं। स्पष्‍ट है कि इस प्रकार की विचारधारा रखने वाली औरत अपने वजूद तले पति का अस्तित्त्व दबा देना चाहती हैं। चाहे नौकरी के दौरान उन्हें कितनी ही मानसिक एवं शारीरिक वेदनाओं से गुज़रना पड़े।

कुछ महिलाओं का मानना है कि शादी से पहले नौकरी की लत इस क़दर पड़ गई होती है कि उसे शादी के बाद छोड़ पाना सम्भव नज़र नहीं आता। एक दृष्‍टि‍कोण यह भी है महिलाओं में कि वक़्त खाली गुज़र रहा है। चलो नौकरी के लिए प्रयास किया जाये। घर की कलह से निजात पाने का नौकरी एक बचाव कहा जा सकता है, कुछ गृहणियां ऐसा मानती हैं।

मज़े की बात यह है कि शादी के बाद जहां महिलाएं नौकरी को प्राथमिकता देती हैं, वहीं शादी के आठ या दस साल बाद महिलाएं नौकरी छोड़ देना पसंद करती हैं।

एक सर्वे के दौरान पाया गया है कि प्राईवेट नौकरियां करने वाली महिलाओं के साथ सर्वाधिक शोषण या अभद्र व्यवहार किया जाता है। यह शोषण शारीरिक या मानसिक दोनों प्रकार का हो सकता है। लेकिन कई बार शोषण की बात पति को पता चलने के बाद भी वह रुपयों को महत्त्व देता है और पत्‍नी को समझा बुझा कर नौकरी न छोड़ने के लिए कहता है।

बहरहाल, कारण और परिणाम चाहे कुछ भी रहे हों, मगर यह सत्य है कि शादी के बाद नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या में गज़ब का इज़ाफ़ा हो रहा है। नौकरी की वजह स्वयं की इच्छा या पति का दबाव या रोज़मर्रा की वस्तुओं की पूर्ति हो सकती है।

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