चले कॉमेडियन्ज़ नेता बनने

पंजाब की धरती केवल शूरवीरों की धरती ही नहीं यहां के लोग दिलों के भी बादशाह हैं। यहां के लोग मेज़बानी के लिए जाने जाते हैं वहीं हास्यकला भी इनमें कूट-कूट कर भरी है। खुद पर हंसना और हंसाना इनकी हास्यकला का एक हिस्सा है। हमने कई बार सरदारों को सरदारों के चुटकुलों पर हंसते ही नहीं देखा बल्कि स्वयं सुनाते भी देखा है। हालांकि पीछे इस तरफ़ ज़्यादा रुझान के कारण कुछ लोग इन पर झुंझलाते हुए भी पाए गए। लेकिन असलियत तो यही है कि हास्यवृत्ति यानि सेन्स ऑफ हयूमर इनमें कूट-कूट कर भरा है।

केवल सरदारों पर ही नहीं पंजाब के बनियों या सभी पंजाबियों पर ढेरों चुटकुले सुनने को मिलेंगे। ख़ासतौर पर पंजाब की पुलिस के बारे में और फिर पुलिस वाले इन का लुत्फ़ उठाते भी देखने को मिलेंगे। ये सेन्स ऑफ हयूमर ही है जिसकी वजह से कॉमेडियन्ज़ ने नेशनल लेवल पर भी अपने झंडे गाड़े है। अगर हम टैलीवुड की बात करें तो पंजाब के कॉमेडियन्ज़ ने अपना अलग स्थान मुकरर्र कर रखा है। हालांकि जब पारिवारिक सीरियल्ज़ के बीच में कॉमेडी का दौर शुरू हुआ तो कॉमेडियन्ज़ की बाढ़ सी आ गई। पंजाब के भी बहुत से कॉमेडियन्ज़ ने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का मन मोह लिया। लेकिन अगर टॉप फोर की बात करें तो कृष्णा को छोड़ कर बाकी तीनों कपिल, भारती और सुदेश लहरी पंजाब से हैं। यहां मेरा मंतव प्रतिभा को आंकना नहीं है। पर जो उन्होंने प्रसिद्धी हासिल की है वो शायद सबसे ऊपर है।

कपिल ने तो लगातार कितने ही शोज़ में लगातार अपनी फ़र्स्ट पोज़ीशन को क़ायम रखते हुए अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है। और इन शोज़ में सबको पछाड़ने के बाद जब उसने खुद का शो शुरू किया तो जैसे बहुत ही आसानी से नंबर वन के सिंघासन पर विराजमान हो गया। कपिल का शो बहुत कम समय में ही इतनी मक़बूलियत हासिल कर गया कि सभी सेलीब्रिटी जैसे वहां खिंचे चले आने लगे। जब वे अपनी प्रमोशन करने आते तो कपिल का भोला, बेचारा चेहरा उनके सामने ग़रीब सा दिखने के प्रयास को हमेशा सफल करता दिखता। हर हीरोइन के साथ फ्लर्टिंग करते हुए भी वो उस मासूम मजनूं सा दिखता जो अपनी पहुंच से बहुत ऊपर छलांग लगाता है और फिर बस सपनों में ही खुश रहता है। कपिल को जहां लोगों का भरपूर प्यार मिला वहीं सेलीब्रिटीज़ ने भी उसे सर आंखों पर बिठाया।

कपिल और भारती ने तो कई बड़े शोज़ की होस्टिंग भी की और टैलीवुड में अपनी पूरी धाक जमाई है। पंजाब से होने के बावजूद हम इनको पंजाबी के कॉमेडियन्ज़ नहीं कह सकते। हम अब बात करेंगे उन कॉमेडियन्ज़ की जिन्होंने एक लम्बा अरसा पंजाबियों के दिलों पर राज किया है। गुरप्रीत घुग्गी और भगवंत मान ने सदा साफ़-सुथरी कॉमेडी के साथ पंजाबियों का मन मोह लिया है। वर्षों वर्ष इनकी कॉमेडी का आनंद लिया है पंजाबियों ने और अब ये नए रूप में लोगों के रू-बरू हो रहे हैं।

सरल भाषा में कहें तो चले कॉमेडियन्ज़ नेता बनने।

भगवंत मान को तो पिछले कुछ वक़्त से अपना कार्यभार सम्भालते हुए देखा जा रहा है। अब गुरप्रीत घुग्गी ने भी राजनीति में छलांग लगा दी है। पंजाब में आजतक हर क्षेत्र में गायक आगे आते देखे गए हैं। अगर फ़िल्मों की बात करें तो एक्टर्ज़ से ज़्यादा गायकों को लोगों ने स्वीकारा है। बहुत से गायकों ने कभी न कभी फ़िल्मों में हाथ आजमाए और बहुत से सफल भी हुए। पीछे तो लम्बा अरसा गायकों का ही फ़िल्मों पर राज रहा है। कुछ एक जगह उन्होंने राजनीति में भी कोशिश की पर शायद सफलता नहीं मिल पाई। यह पहली बार है कि किसी क्षेत्र में गायकों की बजाए कॉमेडियन्ज़ ने हल्ला बोला है।

भगवंत मान का संसद में अलग तरह का पहरावा और अलग तरीक़े से बोलना लोगों को आकर्षित तो करता है। बहुत से लोग वाहवाही करते हैं तो अन्य शुबा से भी देखते हैं कि क्या संसद में बोलने का यह तरीक़ा वाजिब है। जो भी हो जब से उसकी संसद में पहुंच हुई है वो चर्चा में रहा है। कभी तो उसके कोई डायलॉग सोशल मीडिया में वीडियो बने घूमते नज़र आते हैं तो कभी कोई घटना चर्चित हो जाती है। पीछे मोदी द्वारा पानी की पेशकश का वाक़या लोगों की दिलचस्पी का कारण बना रहा।

ये कॉमेडियन्ज़ लोगों को आकर्षित करने में और अपनी जगह सुनिश्‍चि‍त करने में क़ामयाब हो सकेंगे यह तो विश्‍वास जताया जा रहा है। लेकिन असली मुद्दा तो यह है कि क्या ये पंजाब के मुद्दों को, पंजाब की समस्याओं को प्रभावपूर्वक तरीक़े से रख पाएंगे या निपटा पाएंगे।

ख़ैर यह तो भविष्य ही बताएगा कि ये पंजाब की राजनीति को कॉमेडी बनाते हैं या अपनी कॉमेडी को सीरिअस राजनीति में परिवर्तित करने के सक्षम हो पाते हैं। पंजाब के बेहतर भविष्य की आशा में इन कॉमेडियन्ज़ को शुभकामनाएं।

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