नारी के हाथ में मोबाइल

-अनू जसरोटिया

आज की युवा नारी यानी कॉलेज जाने वाली छात्राएं और ऑफ़िस में कार्यरत महिलाओं के हाथों में मोबाइल फ़ोन होना कहां तक उचित है। क्या ये उनकी आवश्यकता है? या फिर महज़ एक शौक़ या फिर स्टेटस सिम्बल?

“नारी तेरी यही कहानी आंचल में है दूध और आंखों में पानी” इस बात को पूरी तरह ग़लत साबित कर रही है आज की नारी। आज के इस मशीनी दौर में वह ज़िंदगी के हर कर्मशील क्षेत्र में पुरुष के बराबर कंधे से कंधा मिला कर डटी हुई है। ज़िंदगी के इस चुनौती पूर्ण मैदान में सौ प्रतिशत खरी भी उतरी है। लेकिन क्या ज़िंदगी की भागदौड़ में मोबाइल फ़ोन ने उसकी समस्याओं को हल किया है या तनाव और मुश्किलों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है?

समयः- समय का घोड़ा हमेशा दौड़ता रहता है जो न कभी रुका है और न तो पीछे मुड़कर देखता है पर अकसर महिलाएं जब मोबाइल पर बात करना शुरू करती हैं तो बस नॉन-स्टाप शुरू हो जाती हैं। घर की दाल-भाजी से लेकर पूरी दुनियां की ख़बरों का खुलासा फ़ोन पर ही करती चली जाती हैं। उन्हें समय का ध्यान ही नहीं रहता और न ही इस बारे में सोचती हैं कि जिससे वो बात कर रहीं हैं कहीं उसकी पढ़ाई या फिर कोई ज़रूरी काम तो नहीं डिस्टर्ब हो रहा। कुछ लड़कियों को तो मैंने ये भी कहते सुना है मोबाइल उनके लिए समय बिताने का अच्छा साधन है। शायद उन्हें पता नहीं बीता समय लौट कर नहीं आता। हो सकता है आपके मोबाइल पर कोई ज़रूरी सन्देश देना चाहता हो पर आपकी व्यर्थ की बातों से ये सम्भव नहीं हो पाया। अतः मोबाइल पर बात करते समय वक़्त की नज़ाकत का ध्यान अवश्य रखें। हो सके तो जो ज़रूरी बात आप किसी से करना चाहते हैं उन्हें एक काग़ज़ पर नोट कर लें ताकि आपका समय भी बचे और बार-बार फ़ोन करके आपके धन का भी दुरुपयोग न हो।

स्थानः- बात करते समय अकसर हम लोग ये भूल जाते हैं कि जब हम मोबाइल इस्तेमाल कर रही हैं कहीं वो सार्वजनिक स्थान तो नहीं। आप ऑफ़िस, कॉलेज बस में हैं तो जगह व माहौल की नज़ाकत को ध्यान में रखते हुए नपे तुले शब्दों में, मीठी आवाज़ में बात करें। क्योंकि जब आप सार्वजनिक स्थान में मोबाइल का प्रयोग करती हैं तो आस-पास के लोग उससे अवश्य प्रभावित होते हैं। इससे या तो आपका व्यक्‍त‍ित्व प्रभावशाली बनता है या फिर आप खुद ब खुद अपने आप को व्यंग्य का पात्र बना देती हैं।

तनावः- कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं अपना मोबाइल नं. सभी दोस्तों को बड़े शान से देती हैं या फिर कई बार ऐसा भी देखा गया है कि किसी ग़लत मित्र को दिया गया मोबाइल नं. आपको तनाव के घेरे में खड़ा कर देता है, होता ये है जो अनमोल समय आपको पढ़ाई में ख़र्च करना चाहिए वो आप बेकार के मैसिज, एस.एम.एस पढ़ने और मिस कॉल को देखने में लगा देती हैं। नतीजा परीक्षा में कम अंक। कई बार ग़लत मैसिज और फ़ोन कॉल इतना तनाव-ग्रस्त करते हैं कि उन्हें मौत का दरवाज़ा ही दिखाई देता है। ऐसा ही एकदम सच्चा क़िस्सा हाल ही में सुनने को मिला। कॉलेज की एक युवा टोली कैंप पर गई वहीं एक अमीर- नवाबज़ादे ने अपनी हमउम्र दोस्त नताशा से पहले तो अच्छी ख़ासी दोस्ती की और दोस्ती की आड़ में अश्‍लील हरकतें शुरू कर दी इतना ही नहीं उसने उन सब हरकतों को अपने एक ख़ास दोस्त की मदद से मोबाइल कैमरे में क़ैद कर लिया। नताशा को शादी का झूठा सपना दिखाने वाला वो अमीरज़ादा बाद में वक़्त बेवक़्त उसे ब्लैक-मेल करने लगा। तंग आकर नताशा ने आत्महत्या कर ली। अतः कभी-कभी छोटी-सी भूल या आसावधानी हमारी ज़िंदगी को नर्क बना देती है।

चरित्र का हननः- कई बार ग़लत मैसिज, ग़लत तसवीरें कच्ची उम्र की लड़कियों को पथभ्रष्‍ट कर देती हैं। अभिभावक सोचते हैं हमारे बच्चे देर रात जाग कर पढ़ाई कर रहे हैं पर जब सब सो जाते हैं तो शुरू होता है मैसिज या फ़ोन कॉल के आने का सिलसिला और ऐसा करते उन्हें खुद भी नहीं पता चलता कि कब वह अपनी मंज़िल से भटक कर ग़लत रास्ते पर आ चुके हैं। और जब पता चलता है तब तक काफ़ी देर हो चुकी होती है।

आज की मशीनी ज़िंदगी के लिए वरदानः- छोटा-सा यंत्र जो हमें पूरी दुनियां से जोड़ता है। बटन दबाते ही प्रदेश में रह रहे हमारे प्रियजनों की ख़ैर-ख़बर देता है वो कभी-कभी संजीवनी बूटी का काम करता है। एक वृद्ध, शाम के समय पार्क में सैर कर रहा था कि अचानक बेहोश होकर बुरी तरह ज़मीन पर गिर पड़ा। पास से गुज़र रही अनीता ने उस वृद्ध को उठाने की काफ़ी कोशिश की पर नाकामयाब रही, अंत में उसने उसकी जेबों की तलाशी ली उसमें पाए गए मोबाइल में उसने आख़िरी कॉल को ही डायल किया और वृद्ध का सारा हाल सुना कर उन्हें नव जीवन दिया।

बड़े-बड़े शहरों में जहां रात को भी ज़िंदगी मशीन बनी होती है। वहां ये छोटा-सा मोबाइल फ़ोन बहुत बड़ा मददगार साबित होता है। किरण जो दिन में कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रही है और रात में परिवार के पालन-पोषण हेतु एक प्राइवेट कम्पनी में कुछ देर काम करती है। एक दिन रात की डियूटी ख़त्म कर वापिस घर आ रही थी कि अचानक स्कूटर का टायर पंचर हो गया। उसने झट से मोबाइल पर अपने भाई को सूचित किया और अपनी समस्या का समाधान पा लिया।

कई बार ट्रैफ़िक जाम में फंस जाने पर या ऑफ़िस में अधिक काम होने पर देरी हो जाती है। ऐसे में ये मोबाइल फ़ोन तुरन्त सन्देश वाहक का काम करके हमारे प्रियजनों के तनाव को कम करता है। एस.टी.डी. / पी.सी.ओ. में जाकर प्रदेश में रह रहे अपनों से बात करने को लाइन में खड़े रहना पड़ता था। कभी कोई निजी बात करने में भी संकोच होता था। इन सब मुश्किलों से आराम दिलवाया है इस यंत्र ने।

सौ बातों की एक बात, मोबाइल ने आज की व्यस्त नारी की कई मुश्किलों का हल कर दिया है शर्त ये है कि वह इसका प्रयोग सूझ-बूझ, वक़्त, स्थान और परिस्थितियों को ध्यान में रख कर करे तो ये उसके लिए एक वरदान से कम नहीं।

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