गर्भपात यहां-वहां न करायें नहीं तो सर्विसाइटिस हो सकता है

-राजा तालुकदार

अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए गर्भपात कराना ज़रूरी हो जाता है। अशिक्षित एवं कम आय वर्ग के लोग पैसा बचाने के चक्कर में अप्रशिक्षित और अकुशल डॉक्टर से गर्भपात करवा लेते हैं जो स्त्री के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। यहां वहां तथा अप्रशिक्षित व अकुशल डॉक्टर से गर्भपात करवाने से स्त्री के सर्विक्स के संक्रमित हो जाने का ख़तरा रहता है। योनि मुख से लेकर गर्भाशय के निम्न भाग के मुख तथा उसके साथ युक्‍त निम्न अंश को ही बच्चेदानी का मुख या ‘सर्विक्स’ कहा जाता है। इस सर्विक्स के संक्रमित हो जाने को ही सर्विसाइटिस या सर्विक्स का संक्रमण कहा जाता है।

इस रोग से ज़्यादातर विवाहित महिलाएं ही ग्रसित होती हैं। गर्भावस्था में, प्रसवोपरांत, गर्भपात होने पर या जच्चागृह के पूर्ण स्टिरलाइज़ नहीं होने पर सर्विक्स में संक्रमण हो सकता है। स्त्री के इस रोग से ग्रसित होने पर उसके पेडू में दर्द होता है, ऋतुस्राव अनियमित हो जाता है, कमर में दर्द होता है तथा योनि से सफ़ेद स्राव निकलता रहता है। नए या एक्यूट सर्विसाइटिस में योनि से सफ़ेद स्राव निकलता है तथा पेडू में दर्द होता है। परीक्षण करने पर पता चलता है कि वह अंश फूल गया है या वहां घाव हो गया है लेकिन रोग पुराना (क्रॉनिक) होने पर उपरोक्‍त लक्षण नहीं दिखाई देते। गनोरिया व क्लेमाडिया आदि रोग या अनियमित ऋतुस्राव व पेट दर्द की शिक़ायत काफ़ी समय तक रहती है। ऐसी हालत में जांच से सर्विक्स के संक्रमण का पता चलता है।

सर्विसाइटिस गर्भपात के कारण भी हो सकता है। अप्रशिक्षित व अकुशल डॉक्टर द्वारा गर्भपात कराये जाने पर भी सर्विसाइटिस रोग हो जाता है यह सर्विसाइटिस उग्र रूप धारण कर सकता है। सर्विक्स से ज़्यादा स्राव होने पर ल्यूकोरिया हो सकता है। निम्नांश का संक्रमण क्रमशः गर्भाशय की ओर फैलने लगता है जिससे डिम्बवाहिनी नलिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इस समय रोगिणी के पेट में तेज़ दर्द हो सकता है। इसे ‘पेल्विक इनफ्लेमेटरि डिज़ीज़्’ कहा जाता है।

प्रसव के बाद सर्विसाइटिस ट्राइकोमोनस हो सकता है। इसके अतिरिक्‍त ‘पेरिनिअल टियर’ के कारण भी सर्विसाइटिस हो सकता है।

ल्यूकोरिया से ग्रसित स्त्री भी इस रोग का शिकार हो सकती है। ऐसे में ल्यूकोरिया का इलाज कराना चाहिए।

यह रोग प्रांरभिक अवस्था में घातक नहीं होता। इसका इलाज दो प्रकार से किया जाता हैः-

1. क्रायोसर्जरी से

2. कॉटरी।

क्रायोसर्जरी से ऑपरेशन द्वारा इलाज किया जाता है। पेरिनिअल टियर होने पर उस अंश को ऑपरेशन द्वारा जोड़ दिया जाता है। सर्विसाइटिस जब क्रॉनिक बीमारी का रूप धारण कर लेता है तब उस अंश को ‘रे’ द्वारा जला दिया जाता है। कुछ दिनों में धीरे-धीरे वहां के ऊतक पुनः जीवित हो उठते हैं और उस स्त्री को भविष्य में मां बनने में कोई कठिनाई नहीं आती।

साफ़-सुथरा रहकर स्त्रियां सर्विसाइटिस रोग से बच सकती हैं, अनेकों पुरुषों से यौन संबंध रखने वाली स्त्रियों को निरोध का प्रयोग नियमित रूप से करना चाहिए। अन्यथा वे इस रोग का शिकार हो सकती हैं। अवांछित गर्भ से छुटकारा पाने के लिए सही स्थान पर कुशल डॉक्टर से ही गर्भपात कराना चाहिए। लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा अनिवार्य है, तभी ऐसे संक्रामक रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

 

 

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