कर्णधार मेरे देश के

-बलदेव राज भारतीय

बॉलीवुड के एक प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक को अपनी देशभक्ति पूर्ण फ़िल्म ‘कर्णधार मेरे देश के’ के लिए नए कलाकार चाहिए थे। उसे कलाकार मिले भी। परन्तु वे नए किसी भी सूरत में नहीं थे। आज तक उन्होंने परदे के पीछे रह कर काम किया था और अब साक्षात् परदे पर आना चाहते थे। ये कलाकार आम और ख़ास दोनों तरह के वर्गों से आए थे। परन्तु निर्देशक महोदय की जान तो सांसत में पड़ ही चुकी थी, चाहे वह इन्हें अपनी फ़िल्म में ले या न ले। आइए, फ़िल्म ‘कर्णधार मेरे देश के’ के कर्णधारों से आप का परिचय करवाते हैं। नहीं-नहीं ये खुद ही अपना परिचय आपको देने जा रहे हैं।

सर्वप्रथम एक अच्छा ख़ासा, मोटा-ताज़ा कलाकार सामने आया और बोला, “ऐ निर्देशक! कान खोल कर सुन। तू जो फ़िल्म बना रहा है उसमें हीरो का रोल मुझसे बेहतर कोई और नहीं कर सकता। देश के निर्माण में मेरी सशक्त भूूमिका रही है। मेरे बिना तो देश तरक्क़ी ही नहीं कर सकता। आने वाले समय में बिना मेरे कोई काम संभव नहीं हो सकेगा। इतनी महत्वपूर्ण बात को तू कैसे भुला सकेगा कि मैं ही इस देश का भावी कलाकार हूं। जी हां, आपने सही पहचाना मैं भ्रष्टाचार हूं। यदि तूने इस फ़िल्म में मुझे काम नहीं दिया तो फ़िल्म डिब्बे में बंद होकर रह जाएगी, कभी बनेगी ही नहीं।”

इसके बाद अपने चेहरे पर सामान्य से अधिक लीपा-पोती किए हुए अपनी आयु को मेकअॅप से छिपाए हुए अभिनेत्री के लिए सशक्त उम्मीदवार ‘बेईमानी’ अपना परिचय देने के लिए प्रस्तुत होती है। उसने इस फ़िल्म के लिए अपना दावा कुछ यूं प्रस्तुत किया, “मैं बेईमानी, आप सब की जानी पहचानी और देश-विदेश में जानी-मानी हूं। इस देश की सच्ची कर्णधार के रूप में मैं हर वक़्त भ्रष्टाचार के कंधे से कंधा मिलाकर चली हूं। जिस प्रकार फ़िल्म जगत में धर्मेन्द्र-हेमामालिनी, जितेन्द्र-श्रीदेवी, गोविन्दा-करिश्मा कपूर की जोड़ियों ने तहलका मचाया है। उसी प्रकार यथार्थ के धरातल पर भ्रष्टाचार और मेरी जोड़ी ने काफ़ी धमाल मचाया है। आप अपनी इस फ़िल्म में हमें ब्रेक देकर देखें। बॉक्स ऑफ़िस की खिड़कियां टूट जाएंगी। रिकॉर्ड टूट कर जुड़ने का नाम न लेंगे। सब तरफ़ एक ही चर्चा होगा सुपर स्टार– भ्रष्टाचार, पर्दे की रानी- बेईमानी। और….. और यही सब तो चाहिए एक फ़िल्म के हिट होने के लिए।”

“ऐ-ऐ- ज़ुबानज़ोर छोकरी। ज़्यादा चपर-चपर मत कर। इस फ़िल्म की हीरोइन के लिए तो मैं सच्ची दावेदार हूं। मेरा नाम ‘महंगाई’ है। इस देश की सारी राजनीति मुझ पर केन्द्रित रही है। सब फेल हो जाते हैं मेरे कारण किसी के वश में कुछ नहीं रहता। देखा था न तूने दिल्ली की पिछली सरकार को प्याज़ महंगे पड़ गए थे। यदि इस निर्देशक ने फ़िल्म में मुझे न लिया तो इसको फ़िल्म महंगी पड़ जाएगी। हां, तू हीरो की बहन के रूप में काम कर लेना। भ्रष्टाचार की हीरोइन तो मैं ही बनूंगी। मेरी राशि भी माधुरी, महिमा, मनीषा और मधुबाला की राशि से मिलती है। तू अब फूट ले यहां से।”

“फूटे मेरी जूती। मैं निर्देशक से कह कर इसे त्रिकोणात्मक प्रेम कथा बनवा दूंगी। जिसमें हीरोइन का रोल मेरा होगा और साइड-हीरोइन का तेरा।”

“ऐ-ऐ लगता है तेरा भेजा ख़राब हो गया है। हीरोइन तो ‘मंहगाई’ ही होगी। तू नहीं। चल ये सब तू निर्देशक पर छोड़।”

“निर्देशक पर क्या छोड़ोगी तुम दोनों। हीरोइन तो सिलेक्ट हो गई।”

“तुम…..?”

“हां मैं…..। तुम दोनों को झगड़ने के सिवा आता ही क्या है? अरे! यह सारा ब्रह्मांड साक्षी है कि भ्रष्टाचार जहां-जहां जाता है, ‘रिश्वत’ वहां पहले पहुंच जाती है। भ्रष्टाचार और रिश्वत दोनों एक दूसरे के पूरक हैंं। इनके बिना संसार में विशेषकर भारत में कोई काम सम्भव ही नहीं।”

“रिश्वत बहन-रिश्वत बहन। मुझे भी अपने साथ कोई छोटा सा रोल दिलवा दो न प्लीज़।”

“अरे आओ ‘सिफ़ारिश’ आओ। छोटा क्या, तुम्हें तो मैं फ़िल्म की सहनायिका का रोल दिलवाऊंगी।”

“और हम…..।” बेइमानी और मंहगाई चिल्लाईं।

“मुझसे क्या….. निर्देशक से कहो। एक आध आइटम गीत तो तुम्हें मिल ही जाएगा।”

“भई सब कुछ तुमने ही तो तय कर लिया, अब मुझे यह भी बता दो कि सदाचार और ईमानदारी को मैं क्या जवाब दूं?” निर्देशक गिड़गिड़ाया।

“अरे, जवाब क्या देना है, फ़िल्म में खलनायक और खलनायिका भी तो चाहिए। बस इनका चयन कर लीजिए।”

धन्य हो, धन्य हो, मेरे देश के कर्णधारों तुम धन्य हो। तुम अवश्य मेरे देश का उद्धार करोगे।

 

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