वर्कशॉप का वाक़या

-मनोहर चमोली ‘मनू’

गुणा मोटर मैकेनिक है। ‘गुणा वर्कशॉप’ के नाम से उसकी मशहूर दुकान है। वो मिस्त्री बहुत अच्छा है। बस ज़्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। नई-पुरानी कैसी भी गाड़ी हो। उसे ठीक करने में गुणा का कोई सानी नहीं। गुणा आज परेशान है। डाकिया उसे एक चिट्ठी थमा गया है। शिक्षा विभाग के निदेशक की ओर से यह चिट्ठी आई थी। लिखा था, ‘नवसाक्षर सरल लेखन पुस्तक निर्माण दस दिवसीय कार्यशाला नैनीताल में है। आप सादर आमंत्रित हैं।’

गुणा ने चिट्ठी अपनी पत्नी को दिखाई। पत्नी ने कहा, ‘आप अच्छे मैकेनिक हैं। सरकार ने आपके काम को सलाम किया है। किताबों की मुरम्मत होगी। दस दिन का समय होगा। जैसी वर्कशॉप आपकी है, ऐसी वर्कशॉप शायद शिक्षा विभाग की नैनीताल में होगी। आप ऐसा करो फटी पुरानी किताबें कबाड़ी बाज़ार से ख़रीद लाओ। ट्रक में भरकर नैनीताल पहुंचो। आम के आम गुठलियों के दाम।’

गुणा ने ऐसा ही किया। ट्रक भरकर किताबें लेकर वो नैनीताल दिये गये पते पर पहुंचा। एक बड़े हाल में दर्जनों चश्माधारी बड़े-बूढ़े किताबों में सिर खपा रहे हैं।

गुणा ने चपरासी से पूछा, ‘वर्कशॉप कहां है?’

चपरासी ने उत्तर दिया- ‘ये वर्कशाप ही तो चल रही है। नवसाक्षरों के लिए यहां ये साहित्यकार और विद्वान किताबें लिख रहे हैं।’

गुणा समझ गया। चुपचाप वापिस जाने के लिए लौटने लगा। तभी शिक्षा विभाग के निदेशक आ गए। निदेशक ने गुणा से वापिस जाने का कारण पूछा। गुणा ने साफ़-साफ़ बताना चाहा, ‘जी! मैं ट्रक में पुरानी किताबें भरकर लाया हूं। मुझे लगा कि इस वर्कशॉप में….’

‘पुरानी किताबें? कहां हैं? यहां तो संदर्भ किताबों की कमी पड़ रही है। चलिए! मुझे दिखाइये। कहां है आपका ट्रक?’ गुणा ने निदेशक को किताबें दिखाई। ‘अरे वाह! पंचतंत्र की कहानियां, परियों की कथाएं, लोक साहित्य! मुंशी प्रेमचंद, शरतचंद्र, मक्सिम गोर्की, चेखव। वाक़ई तुम्हारे पास तो अकूत सम्पदा है।’ निदेशक जी उछल पड़े।

गुणा के कुछ भी समझ नहीं आ रहा है! वह हिम्मत जुटाता है- सर जी। इनकी मुरम्मत!….?

‘वो हम पर छोड़ दो। आपने ऐतिहासिक कार्य किया है। यहां नवसाक्षरों के लिए किताबें लिखी जा रही हैं। यह प्राचीन किताबें खूब काम आयेंगी।

आपको इस स्पेशल कसलटेेन्सी वर्क के लिए दस हज़ार रुपये का चेक अभी देता हूं। आप व्यस्त शख़्सियत हैं। मेरा ड्राइवर आपको अभी घर तक छोड़ आयेगा। डोंट वरी। पर खाना खाकर जाइयेगा।’ गुणा सोच रहा है- यह वर्कशॉप तो वाक़ई अजूबी है। मुझे यूं ही दस हज़ार रुपए….।

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