सानिया मिर्ज़ा पराइड ऑफ़ द नेशन

-सिमरन

भारत के इतिहास की सबसे क़ामयाब टैनिस खिलाड़ी, डबल्ज़ चैंपियन रह चुकी, बेहद ग्लैमर्स सानिया मिर्ज़ा की कहानी अपने आप में पूरी दास्तान है जिस को चंद शब्दों में समेटना मुमकिन नहीं हैं। अपने ग्लैमर के कारण वो जवां दिलों में अपना विशेष स्थान रखती हैं। उनका नाम गूगल में सबसे अधिक खंगाली गई महिला खिलाड़ी के तौर पर भी जाना जा सकता है। ऐसा मुक़ाम भारत की कोई भी महिला खिलाड़ी आज तक हासिल नहीं कर सकी। वो भारत का मान हैं, अभिमान हैं भारत की शान हैं।

15 नवंबर 1986 को इमरान मिर्ज़ा और उनकी पत्नी नसीमा के घर सानिया का जन्म हुआ। 6 वर्ष की छोटी उम्र से उसने टैनिस खेलना शुरू किया। उसके कोच रहे हैं उसके पिता और रोजर एंडर्सन। सानिया सिंगल्ज़ में 27वें नंबर पर थी। उस वक़्त रिस्ट की चोट की वजह से लगभग उसका कैरियर ख़त्म होने की कगार पर था। लेकिन फिर डबल्ज़ में खेलने के फ़ैसले ने उसके कैरियर को पलट दिया और उसने दुनियां की नंबर वन डबल्ज़ प्लेयर का खिताब जीता। इस वक़्त वो अपने कैरियर की बुलंदी पर है। जहां अपनी सफलताओं से सानिया ने हमेशा अपने देश का गौरव बढ़ाया है वहीं वो अपने कैरियर के दौरान बहुत से विवादों में फंसती रही है। लेकिन उसने इन विवादों के कारण अपनी खेल को प्रभावित नहीं होने दिया और शिखर पर अपनी पताका फहरा दी।

सानिया ने 2003 में डबल्ज़ में विंबलडन में जीत हासिल की थी। यहीं से उसके कैरियर की शुरुआत हुई थी। और फिर 2016 में डबल्ज़ में ही विंबलडन जीत कर दुनियां की नंबर वन टैनिस चैंपियन बनने पर वो बेहद गौरवांवित थी। सानिया ने 2016 में विंबलडन में जीतने पर कहा था कि उसे लगता है कि उसने अपना सर्कल पूरा कर लिया है। अपने कैरियर के सफ़र को बहुत रोमांचित मानती हैं।

सानिया मिर्ज़ा और मार्टीना हिंगिस की जोड़ी बेहद चर्चित हुई है। उनके बारे में बहुत-सी बातें कही गईं हैं। सानिया मिर्ज़ा और मार्टीना हिंगिस की जोड़ी बेहद सफल रहने के कई कारण हैं। वो एक दूसरे को मैच करती हैं और एक दूसरे की कमियों को कवर करती हैं। सानिया फोर हैंड में बेहतर है और मार्टीना बैक हैंड में बेहतर है। सानिया कोर्ट की दाईं तरफ़ खेलती है और मार्टीना बाईं तरफ़ खेलती हैं। इस तरह दोनों अपनी स्ट्रेंथ के साथ एक दूसरे को मैच करती हैं और अपनी गेम को ऊंचाइयों तक ले जाती हैं। हालांकि पीछे कुछ मैचों में प्रदर्शन ठीक न होने के कारण इन दोनों की जोड़ी टूट गई है। दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फ़ैसला किया। उनका मानना है कि उनसे उमीदें ज़्यादा हो गई थीं। लेकिन भविष्य में जल्दी दोनों दोबारा इकट्ठा भी खेलेंगी। उन्होंने बहुत लम्बे समय तक मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया है।

मार्टीना की तरह ही महेश भूपति के साथ भी सानिया की जोड़ी शानदार मानी जाती है। महेश भूपति भी बैक हैंड में बेहतर माने जाते हैं और वे भी बाईं ओर खेलते हैं। इस लिए इसके साथ भी सानिया का प्रदर्शन बेहतर रहा है। सानिया मानती है कि मार्टीना और महेश भूपति के साथ वो कोर्ट पर और कोर्ट के बाहर भी बेहतर महसूस करती है। यह बात खेल को बेहतर बनाने में मददगार साबित होती है।

लिएंडर पेस के साथ सानिया का प्रदर्शन बेहतर नहीं माना जाता। इस बारे में सानिया बताती है कि दोनों एक ही साइड खेलते हैं, दोनों की प्राथमिकता फोर हैंड होती है। किसी एक को दूसरी तरफ़ खेलना पड़ता है उससे दिक़्क़त होती है। इस के लिए प्रैक्टिस की ज़रूरत पड़ती है लेकिन मिक्स डबल ज़्यादा नहीं होते हैं इसलिए पहले से प्रैक्टिस का टाइम ज़्यादा नहीं मिलता। इस तरह यह एक कारण हो सकता है। लेकिन सानिया का मानना है कि लिएंडर पेस और उसकी जोड़ी के प्रदर्शन को आप ख़राब नहीं कह सकते क्यूंकि उन्होंने एशियन खेलों में गोल्ड जीता था। हां उनकी जोड़ी इतनी बेहतर नहीं थी यह सही है।

भारत में सानिया के बाद कोई भी दूसरी ऐसी महिला खिलाड़ी नहीं है जो आने वाले समय में सानिया जैसा मुक़ाम हासिल कर सके। इस के लिए सानिया सिस्टम को ज़िम्मेवार मानती हैं। यहां सरकार की तरफ़ से खिलाड़ियों के लिए ज़्यादा सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। इस खेल में खिलाड़ियों को खुद से ही प्रयत्न करने पड़ते है। इसमें बहुत ख़र्चा होता है। वो मानती है कि अभी बहुत फ़र्क़ पड़ा है। उसके समय से अब बहुत बेहतर हुआ है और वो उम्मीद करती है कि आगे और बेहतर इंतज़ाम हो पाएंगे। अपने देश में ही खिलाड़ियों को कोच और प्रैक्टिस के सभी बढ़िया इंतज़ाम उपलब्ध होंगे। उससे महिला खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

सानिया लड़कियों के इस तरफ़ बेहतर प्रदर्शन न होने का एक कारण सामाजिक माहौल को भी मानती हैं। आज भी यहां लोगों की मानसिकता नहीं बदली है। आज भी लोग नहीं मानते कि लड़की खेल सकती है। और यदि लड़की खेलती है तो यह नहीं सोचा जाता कि वो टाइम ख़राब नहीं कर रही है। इस लाइन में आने से ज़्यादा डॉक्टर, वकील, अध्यापक आदि के व्यवसाय बेहतर समझे जाते हैं। लड़की के लिए यह पहली सोच नहीं होती कि वह खिलाड़ी बनेगी। खेल को लड़की के लिए व्यावसायिक तौर पर नहीं देखा जाता। यह नहीं सोचा जाता कि वो लड़कों जैसा ही काम कर रही है या कर सकती है।

सानिया के नज़दीक के कुछ रिश्तेदार भी उसके बारे में ऐसे ख़्याल रखते थे। वो उसका खेल में जाना अच्छा नहीं समझते थे। लेकिन उसे अपने परिवार से पूर्ण सहयोग मिला। बल्कि माता-पिता का उसकी क़ामयाबी के पीछे बहुत बड़ा हाथ रहा। सानिया बताती है कि उसकी बहन उससे दो ही वर्ष छोटी थी। जब उसको देखभाल की ज़रूरत थी उस वक़्त उसकी मां कहीं भी जाने पर सानिया के साथ मौजूद रहती थी। छोटी बहन को छोड़ कर जाना आसान नहीं होता था। सानिया मानती है कि उसके लिए उसके परिवार को बहुत से कॉम्प्रमाइज़ करने पड़े हैं।

मीडिया का सानिया की ज़िन्दगी में महत्वपूर्ण रोल रहा है। जब से सानिया का कैरियर शुरू हुआ उसे बेहद ग्लैमर्स माना गया और सब की पैनी निगाहें उस पर टिक गईं। उसे लोकप्रिय बनाने में मीडिया का भरपूर हाथ रहा है। जहां उसके लिए मीडिया अच्छा साबित हुआ वहीं समय-समय पर कई विवादों को भी मीडिया ने खूब उछाला। सानिया मीडिया के साथ अपने रिश्ते के बारे में बात करते हुए कहती हैं कि मीडिया का उसके साथ लव-हेट रिलेशनशिप रहा है।

सानिया मीडिया के बारे में एक दिलचस्प ब्यान देती है कि मीडिया उसके साथ-साथ परिपक्व हुआ है। विशेष तौर पर इलैक्ट्रॉनिक मीडिया इस समय के दौरान अपने आप को डिस्कवर करने के दौर से गुज़र रहा था। कैरियर की शुरुआत के समय सानिया की उम्र 17 वर्ष थी। इतनी छोटी उम्र में हर समय चकाचौंध में रहना, हर समय मीडिया की नज़र में रहना उसके लिए आसान नहीं था। वो आज परिपक्व हो चुकी हैं चकाचौंध में रहना वो सीख चुकी हैं और कहती हैं कि इतने सालों में वो सीख चुकी हैं कि हरेक को तो खुश नहीं किया जा सकता।

सानिया का विवादों के साथ चोली दामन का साथ रहा है। सानिया की ड्रैस को लेकर उसे अच्छे खासे विवाद को झेलना पड़ा। उसकी ड्रैस को ग़ैर इस्लामिक बताते हुए उसे ड्रैस बदलने कीी हिदायतें तक दी गईं। यह विवाद इतना आगे बढ़ा कि उसकी जान को ख़तरा हो गया और उसे विशेष सिक्युरिटी उपलब्ध कराई गई। एक कॉन्फ्रेन्स में सेफ सेक्स पर बोलने पर भी सानिया को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा कि वो युवाओं पर बुरा प्रभाव डाल रही है। उसके बाद सानिया मिर्ज़ा ने सफ़ाई दी कि वो शादी के पूर्व सेक्स के ख़िलाफ़ है।

एक और विवाद का सानिया को तब सामना करना पड़ा जब एक चित्र में वो तिरंगे का अपमान करती दिख रही थी। सानिया ऐसी बातों को बेहद ग़लत करार देती हैं। वो कहती हैं कि वो इतने वर्षों से भारत के लिए खेल रही हैं। वो इस देश को प्यार करती हैं। इस देश ने उसे सबकुछ दिया है। यह कैसे हो सकता है कि वो तिरंगे का अपमान करे। वास्तव में फ़ोटो ग़लत एंगल से ली गई थी। ऐसी बातों को वो बहुत अन्यायपूर्वक मानती हैं।  

सानिया की सगाई उसके बचपन के दोस्त सोहराब मिर्ज़ा के साथ हुई। जब कि शादी पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक के साथ हुई। शादी के दौरान भी ऐसे हालात हुए कि एकाएक यह शादी सुर्खियों में आ गई। मलिक पर पहले से विवाहित होने का इल्ज़ाम लगा और वह सानिया से पहली पत्नी से तलाक़ लिए बग़ैर शादी नहीं कर सकता था। शुरू में शोएब तलाक़ देने से यह कहते हुए इनकार करता रहा कि उसकी शादी नहीं हुई। ऐसी बातों ने मीडिया क ध्यान आकर्षित किया और शादी को बेहद चर्चित बना दिया। आख़िर में शोएब मलिक को तलाक़ देना पड़ा और तब जाकर उन दोनों की शादी सम्पन्न हो पाई। सानिया इन दिनों को याद करते हुई कहती है कि यह पूरा महीना बहुत मुश्किल था। शादी के दौरान वो यह देखना चाहती थी कि उसकी ड्रैस कैसी लग रही है, बाल कैसे लग रहे हैं, वो कैसी लग रही है। लेकिन उसे यह सब झेलना पड़ रहा था। वो बताती है कि उन दिनों उन्होंने पेपर पढ़ना, टी. वी. लगाना बंद कर दिया था। क्यूंकि हर चैनल पर उनका घर दिखाई दे रहा था। यह बहुत बेहूदा था, हास्यस्पद था।

शादी के विवाद के बाद उसे एक और विवाद का सामना करना पड़ा और वो विवाद था उसके भारतीय होने के बारे में। एक बार नहीं बल्कि उसे बार-बार ऐसी बातों का सामना करना पड़ा है। सानिया इस बात को बेहद दुखदायक और अन्यायसंगत मानती हैं। सानिया का कहना है कि उसे बार-बार स्वयं को भारतीय होने के बारे में क्यूं साबित करना पड़े? उसने इतना लम्बा समय भारत के लिए खेला है। देश के लिए इतने मैडल जीते। हमेशा देश का सम्मान बढ़ाया है। उसे भारतीय होने पर गर्व है और वो अपने को देश भक्त मानती है। सानिया कहती हैं कि शादी के जल्दी बाद ही जब इस प्रकार की बात उठी तो चलो ठीक था लेकिन इतने वर्ष बाद भी बार-बार उसी बात का दोहराया जाना बहुत ग़लत है। वो कहती है कि यदि उनके खेल के बारे में या खेलने के तरीक़े के बारे में बात हो तो उसके लिए यह ठीक है। लेकिन उसकी पहचान के बारे में, उसके रूटस के बारे में, भारतीय होने के बारे में बात करना बेहद अन्यायपूर्ण है। हालांकि उसे तेलंगाना की ब्रांड अम्बैसेडर बनाने पर जब दो लोगों ने उसकी भारतीयता के बारे में प्रश्न उठाए तो तमाम मीडिया और देश के लोगों से सानिया को भरपूर समर्थन मिला। जिससे वो बेहद खुश थी। सानिया कहती है कि लोगों ने उसे इस देश की पुत्री होने का एहसास दिलाया। लेकिन फिर भी ऐसे प्रश्न उठने को उसने अफ़सोसजनक माना। सानिया ने कहा कि जब वो मैडल जीत कर लाती है तब सब लोग बहुत खुश होते हैं। फिर उसकी भारतीयता पर प्रश्न उठाने का क्या मतलब।

इतने विवादों को झेलने के बाद भी वो अपनी खेल के सफ़र को लेकर बेहद रोमांचित है। वो अपने इस सफ़र से खुश हैं। सानिया कहती हैं वो यह नहीं सोचती कि यह सब बुरी बातें उसी के साथ क्यूं हुई। क्यूंकि जो सब अच्छा हुआ उसी के साथ हुआ। जब अच्छे पर यह प्रश्न नहीं किया कि उसी के साथ क्यूं हुआ तो बुरे के बारे में भी वो ऐसा क्यूं सोचे। सानिया अपने विवादों के बारे में, आलोचना के बारे में हंसते हुए कहती हैं कि उसके कारण टी.आर.पी. बढ़ती है, उसके कारण अख़बार बिकते हैं।

सानिया बताती हैं कि वो लोगों से मेलजोल बढ़ाते वक़्त बेहद सतर्क रहती हैं। महिला सेलीब्रिटीज़ होने के कारण वे लोग हरेक के साथ खुल नहीं सकतीं। यह बात बहुत लोगों को उनसे दूर रखती है। इस बात को वो अपनी ज़िन्दगी का एक हिस्सा मानती हैं और सब अच्छे बुरे घटनाक्रम को स्वीकार करती हैं। सानिया कहती हैं कि उसने ऐसे काम किये हैं जिन्होंने इन्सानियत के नाते उसे वैसा स्थापित किया जैसा वो बनना चाहती थी। इससे वो एक मज़बूत महिला के तौर पर स्थापित हो पाई। 17 वर्ष की आयु से 29 वर्ष की आयु के कैरियर के दरमियान उसने सीखा कि हरेक चीज़ के साथ अच्छी बुरी चीज़ें होती हैं और वो यह सब स्वीकार करना सीख चुकी है।

सानिया अपने किये गए दो फ़ैसलों को बेहद सही मानती हैं। पहला शादी का फ़ैसला और दूसरा डबल्ज़ में खेलने का फ़ैसला। सानिया बताती हैं कि कलाई की चोट के कारण उसका खेल रुक गया था। उसका कैरियर ख़त्म हो रहा था। एक समय ऐसा था जब वो सोच रही थी कि वो रिटायरमेंट की घोषणा कर देगी। लेकिन फिर उसने डबल्ज़ में खेलने का फ़ैसला किया। और उस फ़ैसले की बदौलत वो विश्व की नंबर वन खिलाड़ी बन पाई। सानिया का कैरियर जब ख़त्म होने की कगार पर था। उस वक़्त भी बहुत कुछ लिखा जा रहा था, कहा जा रहा था। सानिया कहती हैं कि वो लोग कुछ भी लिखते हैं जब कि उनको कुछ भी पता नहीं होता। सानिया बताती हैं कि वो हड्डियों की एक ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं जिसके कारण उसे चोट ज़्यादा लगती है। वो अपने इस बुरे वक़्त को याद करते हुए बताती हैं कि वो बहुत डिप्रैस थी। इस दौर में वह जब भावनात्मक तौर पर बहुत कमज़ोर महसूस कर रही थी उस वक़्त शोएब से उन्हें बहुत सहारा मिला। वो कहती हैं कि केवल उसी के कारण उसकी वापसी संभव हो पाई और उसी के कारण आज वो इस मुक़ाम पर है।

अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी के बारे में बात करते हुए वो बताती हैं कि उनको भारत और पाकिस्तान दोनों जगहों से भरपूर प्यार मिलता है। वो इस बात के लिए अपने आप को बहुत खुशकिस्मत मानती है। शोएब के पाकिस्तानी होने पर बहुत सवाल उठे हैं। सानिया कहती हैं कि जब हमने एक दूसरे को पसंद किया, एक दूसरे से प्यार किया तो शादी का फ़ैसला किया। वो हंसते हुए कहती हैं कि प्यार तो अन्धा होता है। वो कहती हैं कि जब हम प्यार में थे तो और कोई चीज़ें हमारे दिमाग़ में नहीं थी। हमने यह नहीं सोचा कि मैं किस देश से हूं, वो किस देश से है। सानिया बताती हैं कि उसकी जीत पर उसे दोनों देशों से खूब बधाइयां मिलती हैं।

सानिया की एक ख़ास बात जो उसे सबसे अलग बनाती है वो है उसका बेहद एक्स्प्रेसिव होना। जहां दूसरे खिलाड़ी जीत हार की भावनाओं को दबा जाते हैं वहीं सानिया अपनी हर भावना को, हर विचार को खुल कर व्यक्त करती हैं। ओलम्पिक्स में हारने पर सानिया बेहद भावुक हो गई और उसने अपने दुःख को व्यक्त करते हुए बताया कि यह उसके लिए बहुत मुश्किल समय है क्यूंकि वह नहीं जानती कि अगले ओलम्पिक्स तक वो खेल पाएगी कि नहीं। लेकिन इसके साथ ही सानिया की विशेषता है आगे बढ़ते रहना। वो हार के साथ रुक नहीं जाती अगले मिशन की ओर देखती है और आगे बढ़ जाती है। ओलम्पिक्स में हारने के बाद भी उसने अपने अगले लक्ष्य का ज़िकर करते हुए कहा कि अब उसे अगली गेमज़ की तैयारी करनी है। बार-बार चोट के बाद उबरना, हार के बाद जल्दी उबरना उसके सशक्त व्यक्तित्व को दर्शाता है और यही उसकी सफलता का राज़ है। इसी कारण वो इतनी लम्बी पारी खेल पाई हैं। इतने लम्बे समय तक अपनी पोज़ीशन को बरकरार ही नहीं रखना बल्कि बेहतर करते जाना उसके असाधारण व्यक्तित्व को दिखाता है।

सानिया अपने भविष्य के प्लैन के बारे में बताते हुए कहती हैं कि अभी खेलना बंद नहीं करना चाहती और खेलना चाहती हैं। अभी उसका खेल बेहतर है। 2016 में उसने नंबर वन की पोज़ीशन हासिल की थी। इसका मतलब कि वो बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। वो अभी अपने को खेल में बेहतर महसूस करती है खेल का आनन्द ले रही है। उनको कंपीट करना अच्छा लग रहा है। वो कहती हैं कि जब वो मुक़ाबले के दबाव को नहीं झेल पाएंगी जब वो खेल में आनन्द नहीं महसूस करेंगी तो वो खेलना बंद कर देंगी।

बहुत से मैडल जीतने के अलावा सानिया मिर्ज़ा को अनेकों अवॉर्डज़ भी प्राप्त हुए।

सानिया मिर्ज़ा के अवॉर्डज़ एवं प्राप्तियांः-

1. अर्जुना अवॉर्ड 2004

2. वर्ष के नव आगंतुक का डब्ल्यू टी ए पुरस्कार 2005

3. पद्मा श्री 2006

4. राजीव गांधी खेल रत्ना 2015

5. पद्म भूषण 2016

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