लिखे से पहचाने रोगों के लक्षण और व्यवहार

-विकास कुमार सुथार

आपकी लिखावट से आपके चरित्र, स्वभाव, व्यवहार, आदत और रोगों का पता सहज रूप से लगाया जा सकता है। 1970 के दशक में अमेरिकन रिसर्च सोसायटी ने साबित किया था कि कैंसर से पीड़ित व्यक्ति की सबसे पहले हैंडराइटिंग (हस्तलेखन) प्रभावित होती है लेकिन अब ग्राफोथेरेपिस्ट या हैंडराइटिंग के ज़रिए उपचार करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि हैंडराइटिंग में परिवर्तन करने से आप अपने व्यक्तित्व में सुधार कर सकते हैं। इस तरह आत्मविश्वासी और क़ामयाब इन्सान बन सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हैंडराइटिंग में हल्का-सा सुधार करने से आप अपने व्यवहार में सुधार कर सकते हैं। आप चाहे अपने बारे में नहीं बताना चाहते हों किन्तु आपकी लिखाई जांचने वाला व्यक्ति यदि पैनी नज़र वाला है तो अपकी लिखावट से सब कुछ जान सकता है। इसमें शक नहीं कि हैंडराइटिंग अपके व्यक्तित्व को प्रतिबिंबित करती है। मसलन आत्मविश्वासी का पत्र संक्षिप्त होता है। कभी-कभी तो लेखक इतना आत्मविश्वासी हो जाता है कि पत्र में अपना पता लिखना भी भूल जाता है और पता लिखा भी जाता है तो इतना संक्षिप्त कि उसका खामियाज़ा डाकिये को भुगतना पड़ता है। अगर आप अंग्रेज़ी के अक्षर ‘औ’ और ‘ए’ को लूप के साथ लिखते हैं तो इससे यह साबित होता है कि आप अपने अंदर ही गुम रहने वाले व्यक्ति हैं। जबकि अगर आप ‘डी’ और ‘जी’ लूप के साथ लिखते हैं तो आप आलोचना के लिए हरदम खुले रहते हैं। आप आलोचना को ध्यानपूर्वक सुनने के साथ-साथ सुधार लाने की कोशिश करते हैं। छोटे से काग़ज़ पर नज़दीक-नज़दीक छोटा और बहुत लिखने वाले कंजूस प्रवृत्ति के होते हैं। इस तरह के व्यक्ति हाशिया छोड़ने को मूर्खता समझते हैं। यदि कोई शब्दों की शिरोरेखा (अक्षरों के ऊपर लकीर) न लगाए तो वह हर काम पर आवश्यकता से अधिक समय नष्ट करने वाले होते हैं। मात्राएं छोड़ देने वाले व्यक्ति केवल जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान देते हैं, गौण की चिन्ता नहीं करते। अगर कोई प्रेक्टिस से अंग्रेज़ी के अक्षर ‘टी’ को लम्बा करके काटने लगे तो वह महत्वाकांक्षी होने लगेगा। इसी तरह अगर कोई अंग्रेज़ी के अक्षर ‘डी’ के पेट को खोलकर लिखने लगेगा तो उसमें सीखने का जज़्बा बढ़ जाएगा। लिखते समय बाद वाले शब्द पहले लिख जाना फिर काटकर उन्हें क्रमानुसार लिखना लेखक के उतावलेपन को दर्शाता है। अगर किसी की हैंडराइटिंग में कंपकंपाना और आसक्ति नज़र आती है तो यह अस्थिरता के लक्षण हैं। वह व्यक्ति अगर दाएं या बाएं तरफ़ से निरंतर झुकाव के साथ शब्दों को लिखने लगे तो अपनी इस कमी को दूर कर लेगा यानी उसके इरादों में स्थिरता आएगी। शब्द छोड़ देने वाले व्यक्ति की लेखनी मन की तेज़ी का साथ नहीं दे पाती। शब्दों को सीधी पंक्ति में न लिखकर उबड़-खाबड़ लिखने वाले व्यक्ति ऊबे हुए होते हैं। अगर किसी की हैंडराइटिंग पेज पर नीचे की तरफ़ भागती है तो ये निराशावाद और डिप्रेशन के लक्षण हैं। यह व्यक्ति काग़ज़ पर ऊपर की तरफ़ लिखने का प्रयास करें ताकि इन नकारात्मक तत्वों से बच सकें। पंक्ति में सीधे, सुंदर, न बहुत बड़े अक्षर लिखने वाले उचित काग़ज़ पर हाशिया छोड़कर संक्षिप्त पूर्ण रूप से समझ में आने वाले पत्र का लेखक मानसिक व शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ होता है। कम दबाव देकर लिखने वाले शांत स्वभाव के होते हैं। हैंडराइटिंग से आपके व्यवहार, आदत, रोगों की पहचान तो होती ही है उसके साथ-साथ इनमें सुधार कर इनको दूर भी किया जा सकता है। इसी तरह अगर कुछ अक्षरों के लूपों में स्पौट्स से हैं तो यह दर्द और ग़ुस्से को प्रतिबिंबित करता है। एक ज़माना था जब शायर लोग ख़त को देखकर मज़मून भांप लेते थे। लेकिन लोग आज भी आपकी लिखाई, अक्षरों की बनावट को देखकर आपके बिना बताए आपके बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि आप अपनी लिखाई, अक्षरों की बनावट पर ध्यान देकर अपने व्यक्तित्व को सकारात्मक तत्वों से भर सकते हैं।

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