होली का आनंद नैतिकता के दायरे में

चहुं ओर रंगों की छटा बिखेरता सब को भिगोता त्योहार होली जब आता है तो आनंद का एक माहौल बनता है दूरियों को खत्म करने वाला आपसी मेल मिलाप का त्योहार है होली। जब भी कभी होली की बात चले तो हर किसी के मन में कोई न कोई याद ताज़ा हो जाती है। हमारे यहां शायद ही कोई ऐसा हो जिसने अपनी ज़िन्दगी में कभी भी कोई यादगार होली न मनाई हो। हंसी-ठिठोली के इस दिन में एक दूसरे को रंगने की होड़ में कई कुछ हो जाता है कुछ ऐसा जो यादों में बस जाए। होली का दिन नज़दीक आते ही जहां युवाओं का मन गुदगुदाने लगता है वहीं किशोरियां भावविह्वल भी होती हैं पर थोड़ा बहुत सहम मन में पनपता है। एक ओर यह दिन मनाने की चाह होती है दूसरी ओर अनिष्ट की आशंका भी बन जाती है। कई लोग जो रंगों को पसंद नहीं करते तनाव में भी आ जाते हैं। क्यों न ऐसा हो कि इस दिन केवल आनंद ही आनंद हो कुछ अनिष्ट न हो। किसी को कोई परेशानी न हो। आपकी खुशी किसी की ज़िंदगी में ख़लल न डालने पाए। हंसी खुशी का माहौल तनाव में न बदल पाए। ध्यान रखें कुछ बातों का।

जो रंग न खेलना चाहे उनसे न खेलें। अच्छे रंगों का प्रयोग कर दुर्घटना से बचें। बच्चों को चोट न पहुंचाए। कपड़े मोटे हों और पारदर्शी न हों। नैतिकता का पूरा ध्यान रखें। किसी ऐसे स्थान पर होली न खेलें जहां किसी नुक़सान का डर हो। किसी बीमार व्यक्ति के पास हुड़दंग न मचाएं।

आज के बदले परिवेश में होली आनंद का त्योहार कम, फूहड़पन व हुड़दंग का त्योहार अधिक हो गया है। अक्सर ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं कि किसी के ओछेपन से माहौल तनाव में बदल गया।

कुछ ऐसी घटनाएं हुई जिन्होंने होली के नाम के साथ दुखद यादें जोड़ दीं। रीता का छोटा भाई इस दिन गहरे गड्ढे में गिर गया था। तब की आई चोटों की वजह से उसकी टांग सदा के लिए ख़राब हो गई। सुधा के पारदर्शी कपड़ों की वजह से तो उसके घर में ऐसा तनाव पैदा हुआ कि उसकी पढ़ाई लिखाई छूट गई और वह सदा के लिए घर में क़ैद हो गई। राजू व उसके दोस्तों द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार के कारण उसकी भाभी के साथ उसकी बोलचाल सदा के लिए बंद हो गई और हंसते खेलते परिवार का वातावरण सदा के लिए तनाव ग्रस्त हो गया। अपनी मस्ती में घूमते टोले कई बार राहगीरों व बच्चों को चोट पहुंचा देते हैं। नैतिकता की सीमाएं लांघ जाते हैं। महिलाओं के साथ बेहूदगी पर उतर आते हैं। यहां तक कि इस दिन जान पहचान की महिलाओं के साथ होली खेलते वक़्त भी गरिमा का ध्यान न करते हुए उनके विशेष अंगों पर रंग लगा देते हैं। इसी प्रकार कई बार महिलाओं के पारदर्शी कपड़े होने के कारण भी समस्या पैदा हो जाती है। इसके अलावा घटिया रंगों का इस्तेमाल भी कई बार तनाव पैदा करता है।

होली मनाएं ज़रूर पर ऐसी कि यादों में बस जाए। ऐसा व्यवहार करें जो सब तरफ़ आनंद बिखराए। बुज़ुर्गों व महिलाओं के साथ शिष्टता से पेश आएं। रंगों को अपनी भावनाओं का, आनंद का प्रतीक बनाएं, हुड़दंग का नहीं। होली मिलन की बेला है। इसमें खटास न डालें।

ये सब बातें ध्यान में रखते हुए आइए शामिल हो जाएं होली के रंग में। भीगी है चुनर, रंगे हैं गाल आज तो झूम जाने को मन बेकरार है। आइए हुज़ूर रंगों को आपका इंतज़ार है।

रंगों का मौसम कहता है आज खुशी में झूम लें।

 

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