गृहिणी की ज़िम्मेदारी- ख़रीदारी में समझदारी

 

         -नीलम मेहरोत्रा, मनजीत कौर

रोज़ाना ज़िन्दगी में कई तरह के सामान जैसे सजावटी सामान, कपड़ा, भोजन, गहने आदि की ख़रीदारी गृहिणी ही करती है। आज के समय में बढ़ती क़ीमत मिलावटी चीज़ों और चोर बाज़ारी के कारण यह काम बहुत ही कठिन हो गया है, इसलिए ज़रूरी हो गया है कि गृहिणी अपने ज़रूरी सामान की ख़रीदारी सोच-समझ कर और बुद्धिमानी से करे। चुस्त, जानकार और ज़िम्मेवार गृहिणी ही अपनी आमदनी के अनुसार अच्छे ढंग से ख़रीदारी कर के अपने और अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा कर सकती है। अच्छी ख़रीदारी के लिए गृहिणी की कुछ ज़िम्मेवारियां नीचे लिखी हैं:-

ख़रीदारी करने से पहले हमेशा बाज़ार में चीज़ों को खाकर अच्छी तरह पड़ताल करें। अच्छी तरह परख करके ख़रीदारी करने वाली गृहिणी कभी भी किसी की बातों में आकर अपने सामर्थ्य से ज़्यादा ख़र्चा नहीं करती और न ही उसे ख़रीदारी के बाद कोई पछतावा होता है।

यह ज़रूरी है कि अपनी ज़रूरतों के बारे में दुकानदार को बताओ जैसे कि रसोई का सामान ख़रीदते समय आप किस क्वॉलिटी या डिज़ाइन, साइज़ का सामान लेना चाहते हैं। ताकि दुकानदार का समय इधर-उधर की चीज़ें दिखाने में व्यर्थ न हो और अाप अपनी मनपसंद चीज़ ख़रीद सकें। कपड़े ख़रीदते समय आप कौन-सा कपड़ा, रंग, डिज़ाइन, बजट आदि बताकर ख़रीदारी की प्रक्रिया को सफल बना सकते हैं।

दुकानदार द्वारा बेची गई चीज़ में अगर आप कोई सुधार चाहते हैं तो उसके बारे में अपनी सलाह दुकानदार को ज़रूर दें। ताकि आपको अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ सामान मिल सके।

अच्छी ख़रीद के लिए वस्तु के प्रयोग, संभाल के लिए किताब द्वारा दी गई जानकारी ज़रूर हासिल करें।

जिस तरह आप दुकानदार से ईमानदारी की उम्मीद रखते हैं। उसी तरह आप भी उसके प्रति ईमानदार रहें। जो गृहणियां घर में ही कुछ बनाने का सामर्थ्य रखती हैं जैसे कपड़े सिलना, कढ़ाई, बुनाई करना, जैम, चटनी बनाना या सजावट की चीज़ें तैयार करना उनको अपने परिवार की योग्यताओं और परिवार के साधनों का प्रयोग करके पारिवारिक ख़र्च की बचत करनी चाहिए।

हमेशा ईमानदार दुकानदार से ही चीज़ें ख़रीदें और जो दुकानदार सस्ती और बढ़िया चीज़ें बेचते हैं उनकी प्रशंसा करें।

धोखेबाज़ और ग़ैर कानूनी धन्धे करने वाले दुकानदारों की शिकायत करें। दुकानदारों के धोखे से बचने के लिए और अपनी आमदनी का सही इस्तेमाल करने के लिए इकट्ठे होकर उपभोक्ता संस्था बनायें और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ें।

जो सामान को-ऑपरेटिव या डिपू से मिलता हो उसे दूसरी दुकानों से न ख़रीदें।

यदि उपरोक्त लिखी इन ज़िम्मेवारियों को हर गृहिणी ईमानदारी के साथ निभाए तो इसके साथ उपभोक्ता और व्यापार दोनों में सुधार हो सकता है।

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