पागल

-राज कुमार सकोलिया

सब्ज़ी की एक दुकान पर दो महिलाएं एक-दूसरे को देख कर बहुत प्रसन्न हुई। एक महिला बोली “बहन जी, आपने अपनी बेटी की शादी की तारीख़ निश्चित की कि नहीं अभी?”

“नहीं, बहन जी! वह रिश्ता तो हमने तोड़ दिया है!” 

“क्यों बहन जी! लड़का तो सुना है, सरकारी नौकरी में है!”

“सरकारी नौकरी में तो है, मगर….!”

“मगर, क्या बहन जी?”

“बहन जी, वह लड़का कुछ पागल था!”

“पागल था!”

“हां।”

“मगर हमने तो सुना था कि वह बहुत आदर्शवादी है।”

“हां, इसीलिए तो हम उसे पागल कहते हैं!” 

“बहन जी, बात कुछ समझ में नहीं आई!”

“वह कहता था कि दहेज़ बिल्कुल नहीं लूंगा। बहन जी, उसके साथ बेटी की शादी करके हम समाज को क्या मुंह दिखाते?”

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