-गोपाल शर्मा फिरोज़पुरी

पंजाब प्रांत का अमृतसर नगर एक ऐतिहासिक औद्योगिक और दर्शनीय पवित्र स्थान है जिसके स्वर्ण मन्दिर की ख्याति विश्व भर में हैं। दीपावली के उत्सव पर इस शहर की रौशनियों की धूम जगत् प्रसिद्ध है। एक कहावत के अनुसार “लोहड़ी घर-घर और दीपावली अमृतसर।” दीपावली के साथ हिन्दुओं और सिक्खों की साझी परम्परा जुड़ी है। भगवान श्री राम चौदह वर्ष का बनवास काटकर अयोध्या पहुंचे थेे। इस खुशी में यह पर्व आज तक मनाया जा रहा है। इस दिन सिक्ख गुरु श्री हरगोबिन्द जी मुग़लों की क़ैैद से आज़ाद हुए थे। इस लिये दीपावली के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

अमृतसर का लाहौर के साथ व्यापारिक संबंध रहा है। लाहौर और अमृतसर का व्यापारिक सम्पर्क बड़े पैमाने पर होता था और आपस में भाईचारा अटूट था।

अमृतसर लगभग साढ़े चार सौ साल पुराना शहर है। श्री हरिमन्दिर साहिब का निर्माण श्री गुरु रामदास जी ने करवाया था बाद में श्री गुरु अर्जुन देव जी ने इस कार्य को सम्पूर्ण किया था। कहते है एक सूफी संत मियां मीर ने सन् 1588 में इस गुरुद्वारेे की नींव रखी थी परन्तु यह बात प्रमाणित नहीं है अत: यही सत्य है कि श्री गुरु अर्जुन देव ही इसके निर्माता है।

श्री हरिमन्दिर साहिब या स्वर्ण मन्दिर सिक्खों का पवित्र गुरुद्वारा है जो एक सरोवर के बीच में बना हुआ है। गुरुद्वारे की इमारत के चारों तरफ़ दीवार बनी हुई है जिसके चार प्रवेश द्वार हैं। गुरुद्वारे की इमारत सोने की होने के कारण इसे गोल्डन टेम्पल कहते है। अमृतसर के गोल्डन टेेम्पल की विशेषता यह है कि यहां गुरबाणी का पाठ दिन रात चलता रहता है। और इसका लंगर बड़ा लजीज़ है जिसमें हज़ारों लोग इसका लुत्फ़ उठाते हैं।

गोल्डन टेम्पल एक विशाल परिसर है जिसमें दर्शनी ड्योढ़ी, अमृत सरोवर, अकाल तख़्त, सेंट्रल सिख म्यूज़ियम स्थित है। अमृतसर के बाज़ारों में पापड़, बड़ियां, आम का अचार, सुन्दर कृपाणें और सिक्खों के दस गुरुओं की तस्वीरें मिलती हैं। स्वर्ण मन्दिर शहर का स्वर्ग स्थल है। इसमें रोशनी की बहुत सुन्दर व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु स्वर्ण मन्दिर के सामने सर झुकाते हैं। पैर धोकर सीढ़ियों से मुख्य मन्दिर तक जाते हैं। 

सन् 1984 के ब्लू स्टार ऑपरेशन में स्वर्ण मन्दिर को बहुत नुक़सान पहुंचा था। इसकी सुन्दरता को क्षति तो पहुंची ही थी परन्तु जान-माल का भी बहुत नुक़सान हुआ था। इसको पुन: पहली पोज़ीशन में लाने के लिए बहुत मेहनत करके इसकी सुन्दरता को संवारा गया है। यह धार्मिक गुरुद्वारा सभी धर्मों की आस्था का केन्द्र है। यहां एक दु:ख निवारण बेरी का पेड़ है, जिसके नीचे बैठकर या खड़े होकर शुद्ध मन से प्रार्थना करने पर अपने मन की मुराद पूरी होती है। गोल्डन टेम्पल का महत्त्व इसलिये भी है कि ताज महल के बाद सबसे ज़्यादा पर्यटक इसे देखने आते हैं।

यहां एक बहुत प्रसिद्ध हाल बाज़ार है, यहां हर क़िस्म की ज़रूरत की चीज़ें खरीदी जा सकती हैं। पास में जलियांवाला बाग का ऐतिहासिक स्थल है जहां रोल्ट एक्ट के विरोध में इक्ट्ठे हुए लोगों पर जनरल डायर ने तोपों से प्रहार करके नरसंहार किया था। अमृतसर में माता लाल देवी मन्दिर, महाराजा रणजीत सिहं का समर पैलेस भी देखने योग्य है। अमृतसर में कई गुरुद्वारे देखने योग्य हैं। जिसमें गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह शहीद, गुरुद्वारा रामसर साहिब, गुरुद्वारा बिबेकसर साहिब और गुरुद्वारा मंजी साहिब हैं। 

1947 के बंटवारे के बाद भारत दो हिस्सों में बंट जाने के कारण पाकिस्तान हमसे अलग हो गया है। अमृतसर से कुछ ही दूरी पर भारत-पाक सीमा पर वाघा चेक पोस्ट भी एक प्रसिद्ध जगह बन गई है। यहां भारत और पाक सैनिक अपनी-अपनी सीमा पर रह कर अपने देश के लिये प्रहरी का कार्य करते हैं। 

शहर में शीतला मन्दिर, दुर्गियाना मन्दिर, कम्पनी बाग भी देखने योग्य हैं। इन सब में अमृतसर की दीपावली विश्व प्रसिद्ध है। लाखों दीप जलते हैं जो भी एक बार अमृतसर की दीपावली देख लेता है बार-बार आने का दिल करता है।

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