• लम्बे रास्ते तय हुए हैं। इस संघर्ष की लम्बी दास्तां है। यदि हम पिछली सदी की शुरूआत में औरत की हालत देखें तो समझ पायेंगे। यह संघर्ष तब शुरू हुआ था जब इसकी सच्चाई का कोई ओर छोर भी नज़र नहीं आता था।

  • साहित्यकार सत्ता द्वारा बनाए ख़्वाबों के भ्रम ख़त्म कर वास्तविकता से अवगत कराता है और नए सपने सजाता है। वो आने वाले युगों के लिए चिंगारियां संभाल छोड़ता है, जो भविष्य में रौशनी दे सकें।

  • जब दबी हुई चिंगारियां धधकने लगती हैं तो ज्वालामुखी फटता है, ज़लज़ले आने लगते हैं जब बरसों की चुप्पी टूटती है तो गूंज देर-देर तक, दूर-दूर तक सुनाई देती है। अब औरत की चुप्पी टूट चुकी है।

  • चूड़ियां पहन तो लेती हूं मैं ....... पर खनकने नहीं देती ...... आंसू आंखों में आ भी जाएं ...... पर टपकने नहीं देती।

  • आज़ाद भारत की आज़ाद औलादों को आज़ादी के इतने वर्ष बाद आज क्या मिला है? जनसंख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी, बेरोज़गारी, हिंसा, रिश्तों में बिखराव, भ्रष्टाचार, भ्रूण हत्या, धर्मादिक दंगे, फ़साद, उग्रवाद व गन्दी राजनीति

  • कितनी सुखद है यह कल्पना कि प्रत्येक युवती विवाहोपरान्त वे सारी खुशियां हासिल कर सके, वे सारे सपने सच कर सके, वे सारे वादे निभा सके, वे सारे इरादे परवान चढ़ा सके, जिनकी कल्पना उसने विवाहपर्यंत की थी।

  • मन में कुछ करने की तमन्ना हो, तसव्वुर में खूबसूरत कल्पना और हाथों में क़लम हमें बढ़िया लेखन के लिए बाधित करते हैं। कोई भी अच्छे विचार तब तक क़ाबिले तारीफ़ नहीं होते जब तक लिखने का हुनर न हो।

  • क्यों न हम इस नई सुबह में नए सिरे से नई कोशिश करें। कुछ ऐसा कि लोग करें आरज़ू, कुछ ऐसा कि ज़माना मिसाल दे।“नए दौर में लिखेंगे हम मिल कर नई कहानी।”

ज़िन्दगी क्या है?

इस ब्राह्मांड में तीन लोक हैं, पृथ्वी लोक, जिस पर हम रह रहे हैं। स्वर्ग लोक, देव लोक, पाताल लोक। इन के परमात्मा ने अलग-अलग स्वामी नियत किये हैं।

नारी सशक्तिकरण कैसे हो ?

कोई उसकी पुकार सुनने वाला नहीं है। प्रशासन क्यूं बेबस हो जाता है, कानून क्यूं घुटने टेक देता है, पुलिस क्यूं ख़ामोश रहती है पता नहीं।

 खेलें बच्चों को नशे से बचायेंगी

शराब, गांजा, कोकीन, हेरोइन के आदी नवयुवक, युवतियां देश की रक्षा कैसे करेंगे? कैसे ये बच्चे सेना, पुलिस, सुरक्षाबलों में भर्ती होकर देश की रक्षा करेंगे?

हौसला

ये क्या बुज़दिली है। आपको बिना क़सूर किए मरने की क्या ज़रूरत है। भाढ़ में जाए समाज और भाढ़ में जाएं रिश्तेदार, हमें धैर्य और हौसले से जंग जीतनी होगी।

मज़ेे लूटो बरसात के

इन राड़ों को चित्रते हुए लड़कियां गीत भी गाती हैं- उड़ मर, कूंजड़ीए अड़ीए नी सौण आया। उत्तर में भी अपने आप ही गाती हैं – किवें उड़ां नी मड़ीए देस पराया।

सरकारी नौकरी का करिश्मा

उसके ऑर्डरों पर साफ़ लिखा था दो वर्ष प्रोबेशनरी पीरियड बीत जाने के बाद पूरा वेतन तीस हज़ार मिलेगा। दीक्षा के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी। वह जाॅॅॅइन करे या न करे।

चुनाव लाभदायिक व्यवसाय है

चुनाव आते राजनीतिक पार्टियां लंगोट लगा वोटर अखाड़े में दूसरे को चित्त करने को तैयार होती हैं। हर दल साम-दाम दण्ड-भेद छल-कपट और हर प्रकार के मिथ्य दावों का ढिंढोरा पीटता है।

गर्भवती महिलाओं को बिल्लियों से ख़तरा

बिल्लियां गर्भवती महिलाओं के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं ने यदि बिल्लियां पाल रखी हैं तो उनको ध्यान रखना चाहिए कि बिल्लियां उनसे दूर ही रहें।

आसमां पर पांव हम धरते रहे

कब सहर हो और कब दीदार हो,
रात सौ-सौ बार हम मरते रहे।
रात हो बरसात हो कुछ बात हो,
क्या-क्या आरज़ू करते रहे।

वन सम्पदा को बचाईये

बेतहाशा पानी बहाकर पानी के स्त्रोतों को मिटा रहे हैं। नदियां तालाब सब सूख रहे हैं हम इनमें गन्दगी फैलाकर पर्यावरण को दूषित कर ही रहे हैं बीमारियों को भी आमन्त्रण दे रहे हैं।

बाकी सवाल

रात के
इस पहर के बाद,
रात और कितनी बाकी है।
वक़्त के
इस पड़ाव के बाद,
ज़िदगी
और कितनी बाकी है।

वफ़ादार

“नहीं, नहीं सीमा नहीं, तुम्हें मैं कहीं भी लेकर नहीं जा रहा हूूं, तुम तो धोखेबाज़ हो, आज मैंनें तुम्हें अच्छी तरह से परख लिया है।”
“क्या कहा, धोखेबाज़। और वो भी मैं?

लम्बे पुरुष एक से ज़्यादा बार शादी करते हैं।

अगर आपसे कहा जाए कि लम्बे पुरुषों के पहले वैवाहिक सम्बन्ध को सौतिया डाह के कारण टूटने का ख़तरा रहता है तो क्या आप विश्वास कर लेंगे। नहीं न!

लम्बी अवधि साथ बिताने के बाद पति-पत्नी भाई बहन से लगने लगते है।

कुछ जजों को चित्र दिए गये यह नहीं बताया गया कि कौन किसका पति पत्नी है। जजों ने चेहरे के हाव भावों से अनुमान लगा दिया।

क्या पंजाबी भाषा का भविष्य धुंधला है ?

इसलिये इसका भविष्य अंधकारमय नहीं उज्जवल है। पंजाबी के विद्वान अपने निजी हितों को छोड़कर इसके उत्थान में सैमीनार लगा रहे हैं।



कुछ फ़र्ज़
कुछ ज़िम्मेवारियां
कुर्बानियां, समर्पण, Adjustments
यही सब ?
नहीं.........
कुछ और भी तो है
जो अपनी बेटियों को बताना है।

हक
अधिकार




महिला के अस्तित्त्व को लेकर
चिंतित हुई है स्वयं महिला।
उसने जाना है अपने महत्‍व को।
अहसास कराया है अपने होने का।
मोहताज हुआ है मर्द, उसकी उपस्थिति का।
उस बिन विश्‍व बाज़ार का व्यापार अधूरा है
उसके होने से ही प्रकृति का सृष्‍टि चक्र पूरा है।








जब किसी शख्‍़स का कद बढ़ता है
तो तारीख़ उसके हाथ में आ जाती है।
जब दुनियां में वो
अपनी अलग पहचान बना पाता है तो
शख्‍़स नहीं शख्सियत हो जाता है।



आधुनिक युग की नई नारी
बदली नारी का बढ़ता हुआ कद
नया ज़माना
नया संघर्ष
कुछ संभावनाएं, कुछ दुविधाएं
कुछ अनसुलझे सवाल
कुछ उलझे हुए जवाब

गौरतलब हैं नारी समस्याएं



महिला स्वयं में शक्तिपुंज है, पर उसे चाहिए संविधान में मिले अधिकारों का ज्ञान। उसे चाहिए उसकी योग्यता का सम्मान | मर्द के बराबर स्थान, उसकी हर ज़रूरत पर ध्यान देना होगा। तभी समाज का कल्याण संभव है।

कुछ बातें महिला सशक्तिकरण के बारे में





दया, ममता, त्या‍ग ही नहीं
साहस भी है, हिम्म्त भी है।
सीता ही नहीं रणचण्डी भी है।

चिन्तनीय ही नहीं
चर्चा के योग्य भी है
आज शक्तिस्वरूप महिला



लेखक धरती पर प्रकाश सतम्भ,
जो खराब से खराब मौसम में भी
बुझते नहीं, धुंधलाते नहीं,
खुद को जला कर रोशनी करते,
अंधेरे मिटाते, नई राह दिखाते,
उन्नति के शिखर पर ले जाते।




अक्षरों की दुनियां,
अलफाज़ों की दुनियां,
पढ़ने पढ़ाने के रिवाज़ों की दुनियां
आज इन्टरनेट युग में पढ़ने के रिवाज़ न छूटें इसलिए आईए आपका पुस्तकों से तारूफ कराएं।


शब्द मटक मटक चलें तो कहानी,
नृत्य करें तो कविता,
शब्द तीर कमान बनें तो व्यंग्य,
शब्द बिहारी के सतसयै तो लघुकथा
अपने दर्द के आईने से
सारे जहां की पीड़ा का अवलोकन
समूची मानवता का दर्पण
समाज से पाया समाज को अर्पण।




Feminism isn't about making women strong .................. Women are already strong .................. It's about changing the way the world perceives that strength' - G. D Anderson



कोई कहे सुख का आधार, कोई माने दु:ख का अम्बार बेशक मिलते लाखों दंश इस से बढ़ता हमारा वंश, रिश्तों के धागे में बंधे, एक दूसरे के दु:ख सुख में रमे, बढ़ता जाए यह काफिला। बना रहे स्नेह सम्बन्ध। फैलती रहे नेह सुगंध।



अमूल्य शब्दों के खज़ाने जो कुदरत के शाश्‍वत मूल्य, कुदरत के रहस्य, कुदरत के सिद्धान्त, कुदरत के नियम समझें और समझायें उन नियमों पर चलना सिखाए उन के अर्थ समझाएं जीवन के दर्शन कराए जीवन को सफल बनाए। आप के लिए चुन के लाए।








जीवन रूपी रथ के सारथी की मुख्य भूमिका निभाने वाले युगल वास्तविक ज़िन्दगी में दु:ख, सुख भोगते हुए- कितने ही कवियों की कविता में,
कितने ही लेखकों की कहानियों में
स्वयं उतर आते हैं।

कुछ कही कुछ अनकही
युगलों की कहानी----



पांच दरियाओं की धरती,
पांच दरियाओं का आब,
जहां कुदरत करे कमाल,
गिद्धे भंगड़े की धमाल,
पग-पग बिखरे रंगे जमाल,
सुनहरी कनके, सतरंगी पींघें,
इस धरती के जाये-जहां जाएं छा जाएं।
जिसका जग में नहीं जवाब-
उस धरती का नाम है- पंजाब....




भागमभाग, दौड़धूप, दु:ख तकलीफ
से चुराएं कुछ पल,
कुछ गुनगुनाएं, थिरकें,
सब कुछ भूल कर अपने में खो जाएं।
जीवन के चुनिंदा पलों में पर्व मनाएं,
उत्सव को कुछ यूं मनाएं- जीवन उत्सव हो जाए।
जीवन की सारी कड़वाहत भूल जाएं।





प्यार को वात्सल्य, इश्क, इबादत, स्नेह, मुहब्बत न जाने कितने नामों से जाना जाता है। प्रेम के जितने नाम हैं उतने ही रूप हैं। पर जो रूप सर्वमान्य है वो है पवित्र प्रेम जिसे इबादत का नाम दिया जाता है। पर आज इसके मायने बदल रहे हैं, आज पवित्रता आहत है। प्यार अपने साथ प्रश्‍न चिन्ह लिए खड़ा है।
क्या हैं ..... आज प्रेम के मायने.....???




जीवन के नियम
मनुष्य के कर्त्तव्‍य
पहले जानो- फिर पहचानो
फिर अपनाओ
कर्म योगी बन जाओ
गुरू की शिक्षा-दीक्षा लेकर
जन्म जन्म से मुक्‍त‍ि पाओ।
प्रभु को जानो- प्रभु के हो जाओ।




आज भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में रिश्ते अपने मायने खोते जा रहे हैं, अपनी मासूमियत खोते जा रहे हैं। आओ फिर से नए रास्ते तलाश करें। अखलाक की ज़मीं पर पावन, विश्‍वसनीय रिश्ते बनाएं


मुहब्बत के नए फूल खिलाएं
प्यार के दीप जलाएं....




युवावस्था की दस्तक
नए स्वपन, नई अंगड़ाइयां
तमाम रोकों, तमाम बंदिशों के साथ
अकांक्षाओं, अपेक्षाओं भरा सुहाना सफ़र

Our growing children-Teenagers




वक्‍़त के साथ दिन रात बदलते हैं,
मौसम बदलते हैं,
तन बदलते हैं, मन बदलते हैं।
जो वक्‍़त के साथ नहीं बदला
समझो वह इस दौर से पिछड़ गया,
और जो समझदारी के साथ
नहीं बदला वह भटक गया।

बदलाव की कहानी शब्दों की ज़ुबानी।








उपेक्षित महसूस करती बुज़ुर्ग पीढ़ी
हस्तक्षेप से हताहत नई पीढ़ी
तालमेल की कमी
Generation Gap

आज तेज़ रफ़तार ज़िन्दगी में बेहद व्यथित एवं असमंजस की स्थिति में हैं हमारे घर का आधार-हमारे बुजुर्ग।

प्रश्न कई हैं .....???




हर इंसान समान नहीं
सभी महिलाएं समान नहीं
सभी पुरुष व्यभचारी नहीं
बदले समय में बदलने के बावजूद
औरतों के लिए सहयोगी रवैये के बावजूद
पुरुष शंकाओं से मुक्त क्यों नहीं ?

पुरुष समस्याएं गौण क्यूं ?
कुछ सवाल, कुछ शिकायतें..........





भ्रष्टाचारी, बेरोजगारी,बाल मज़दूरी वेश्यावृत्ति, कन्या भ्रूण हत्या, मज़दूरों का, गरीबों का शोषण, लड़कियों से छेड़छाड़, बलात्कार, बढ़ती नशे की लत, प्रदूषण, बाबाओं का जाल, दहेज, लिंगभेद, जात-पात, कट्टरवाद, आतंकवाद--
मेरा हिन्दोस्तान आज इतना बीमार क्यूं है ?
मेरा हिन्दोस्तान आज इतना लाचार क्यूं है ?




बच्चे प्रत्येक देश का उज्जवल भविष्य होते हैं। यह बच्चे उस सारथी के समान होते हैं। जिन्होंने देश रूपी रथ को सही दिशा में अग्रसर करना होता है। परन्तु आज इस देश का भविष्य स्वयं शोषित हो रहा है भटक रहा है, पशोपेश में है।

आज चिन्तनीय है- बाल्यवस्था।



कोई बात जो होंठों में दबी रह गई, कोई अफसाना जो सुनाया न गया
एक कहानी जो दास्तां न बन पाई
कुछ कहना था पर कह नहीं पाए
या शायद वो सुन नहीं पाए
कितने ही अफसाने हैं जो सुनने हैं सुनाने हैं।