• साहित्यकार सत्ता द्वारा बनाए ख़्वाबों के भ्रम ख़त्म कर वास्तविकता से अवगत कराता है और नए सपने सजाता है। वो आने वाले युगों के लिए चिंगारियां संभाल छोड़ता है, जो भविष्य में रौशनी दे सकें।

  • जब दबी हुई चिंगारियां धधकने लगती हैं तो ज्वालामुखी फटता है, ज़लज़ले आने लगते हैं जब बरसों की चुप्पी टूटती है तो गूंज देर-देर तक, दूर-दूर तक सुनाई देती है। अब औरत की चुप्पी टूट चुकी है।

  • चूड़ियां पहन तो लेती हूं मैं ....... पर खनकने नहीं देती ...... आंसू आंखों में आ भी जाएं ...... पर टपकने नहीं देती।

  • कितनी सुखद है यह कल्पना कि प्रत्येक युवती विवाहोपरान्त वे सारी खुशियां हासिल कर सके, वे सारे सपने सच कर सके, वे सारे वादे निभा सके, वे सारे इरादे परवान चढ़ा सके, जिनकी कल्पना उसने विवाहपर्यंत की थी।

  • दोस्ती एक इनायत है, इन्सान की सबसे पहली ज़रूरत। प्यार भगवान् द्वारा बख़्शा इन्सानियत का तोहफ़ा, एक खूबसूरत एहसास। मुहब्बत एक ऐसा जज़्बा है जो रूहों तक असर छोड़ता है, ज़िन्दगी जीने लायक़ बनाता है।

  • कोई कुड़ी तो चिड़ी जैसा भाग्य भी लेकर नहीं आई। चिड़ियां तो खुले आसमान में उड़ लेती हैं मगर कुड़ियां? कुड़ियां उड़ने की कोशिश में एक क़दम भी ऊंचा उठा लें तो उसके पर कतरने के लिए पूरा समाज उठ खड़ा होता है।“

  • मन में कुछ करने की तमन्ना हो, तसव्वुर में खूबसूरत कल्पना और हाथों में क़लम हमें बढ़िया लेखन के लिए बाधित करते हैं। कोई भी अच्छे विचार तब तक क़ाबिले तारीफ़ नहीं होते जब तक लिखने का हुनर न हो।

  • क्यों न हम इस नई सुबह में नए सिरे से नई कोशिश करें। कुछ ऐसा कि लोग करें आरज़ू, कुछ ऐसा कि ज़माना मिसाल दे।“नए दौर में लिखेंगे हम मिल कर नई कहानी।”

पुनर्स्थापना

खुजराहो के
किसी मंदिर की
भित्ति से चुरा कर
एक ऋषि ने
मंत्र-सिद्ध कर
तुम्हें साकार कर दिया
मेरे लिए

सुबह की बेवफ़ाई

रात भर
चांद खड़ा रहा
सुबह के इंतज़ार में
सुबह आई
साथ सूरज लाई
मिट गया चांद
उसके आने पर

प्रेम बनाता है लड़कियों को मोटा

लड़कियां रिश्ते के प्रति विश्वसनीय रहती हैं और वज़न के बढ़ने के बारे में लापरवाह रहती हैं। लेकिन प्रेम में पड़ने से पहले या रिश्ता टूटने अपने वज़न पर कंट्रोल रखती है

चश्मा लगाइये नींद भगाइये

एक ऐसे चश्मे का निर्माण किया है जिसमें लगा प्रकाश रोधक पलकें बंद होने पर स्वंय टूट जाता है।साथ ही एक विशेष प्रकार का सायरन बजने लगता है।

टी.वी.शोज़ में फ्लर्टिंग का तड़का

कॉमेेडी के रंग भरे जाने का सिलसिला जब चलता है तो कॉमेेडी का एकमात्र मान दंड जैसे फ्लर्टिंग को ही मान लिया गया।

औरत

बिख़र गई हूं
पंक्ति बन कर मैं।
अपने-अपने दृष्टिकोण पर,
सबने परखा मुझको।
मनचाहा अर्थ लगाया मेरा।
कौन समझा सही अर्थ को ?

कल्पनाओं को साकार करता कैरियर फ़ैशन डिज़ाइनिंग

आज अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भी फ़ैशन ने अपनी जगह ढूंढ़ ली है। आए दिन जो यह पढ़ा जाता है कि अमुक डिज़ाइनर इतना कमा लेता है

अपराधी छवि वालों के लिए शुभ अवसर

अपने अपराधों से मत शरमाइए। आइए, आइए, आइए, अपने अपराधों के आधार पर हमारी पार्टी के थ्रू राजनीति में अपनी आदरणीय जगह बनाइए।

नये अशआर

लांघ कर जिस दम
रिवायत की हदों को आएगी
देख लेना फिर वो
बस्ती भर में पत्थर खाएगी
चांद तारे मुंह छिपा लेंगे
घटा की ओट में
कोई गोरी अपनी छत पर
ज़ुल्फ़ जब लहराएगी

अधिकारों एवं कर्त्तव्यों के बीच सामंजस्य

आप फ़र्ज़ को निभाते हुए अधिकार लेने मेें संकोच न करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो आप अपने अधिकारों के प्रति उदासीन हैं।

कौमी एकता

वो तवायफ़
कई मर्दों को पहचानती है
शायद इसलिये
दुनिया को ज़्यादा जानती है
उसके कमरे में
हर मज़हब के भगवान् की
एक-एक तस्वीर लटकी है

महिलाओं की समाज के प्रति भूमिका

सुष्मिता सेन, ऐश्वर्या राय, मनप्रीत बराड़ तो बनना चाहती हैं लेकिन मदर टेरेसा की तरह स्वयं दुःख सहन करके दूसरों को सुख दे सके, ऐसी भावना आलोप हो रही है।

महिलाओं के कर्त्तव्य और अधिकार

चमकती है लौ एक
चांद तारों के साथ।

एक ज़िंदगी अभी दूर
तन्हाइयों में है।।

इक दिन धरातल पर
उसको भी तो लाना होगा।

जोंक

सता की कुर्सी के पैरों में
जनता का लहू बहता है
उस पर सवार नेता उसे
जोंक की तरह चूसता रहता है
छुटभैये भी मच्छर की तरह
भिनभिनाते रहते हैं मौक़ा लगते
ही चूस कर उड़ जाते हैं

थोड़ी ही देर सही

थोड़ी ही देर सही
मौसम खुशगवार हुआ तो था।
थोड़ी ही देर सही
तुझको प्यार हुआ तो था।
कहां गया वह पौधा
जिसे लगाने पर
बूटा-बूटा चमन का



कुछ फ़र्ज़
कुछ ज़िम्मेवारियां
कुर्बानियां, समर्पण, Adjustments
यही सब ?
नहीं.........
कुछ और भी तो है
जो अपनी बेटियों को बताना है।

हक
अधिकार




महिला के अस्तित्त्व को लेकर
चिंतित हुई है स्वयं महिला।
उसने जाना है अपने महत्‍व को।
अहसास कराया है अपने होने का।
मोहताज हुआ है मर्द, उसकी उपस्थिति का।
उस बिन विश्‍व बाज़ार का व्यापार अधूरा है
उसके होने से ही प्रकृति का सृष्‍टि चक्र पूरा है।








जब किसी शख्‍़स का कद बढ़ता है
तो तारीख़ उसके हाथ में आ जाती है।
जब दुनियां में वो
अपनी अलग पहचान बना पाता है तो
शख्‍़स नहीं शख्सियत हो जाता है।



आधुनिक युग की नई नारी
बदली नारी का बढ़ता हुआ कद
नया ज़माना
नया संघर्ष
कुछ संभावनाएं, कुछ दुविधाएं
कुछ अनसुलझे सवाल
कुछ उलझे हुए जवाब

गौरतलब हैं नारी समस्याएं



महिला स्वयं में शक्तिपुंज है, पर उसे चाहिए संविधान में मिले अधिकारों का ज्ञान। उसे चाहिए उसकी योग्यता का सम्मान | मर्द के बराबर स्थान, उसकी हर ज़रूरत पर ध्यान देना होगा। तभी समाज का कल्याण संभव है।

कुछ बातें महिला सशक्तिकरण के बारे में





दया, ममता, त्या‍ग ही नहीं
साहस भी है, हिम्म्त भी है।
सीता ही नहीं रणचण्डी भी है।

चिन्तनीय ही नहीं
चर्चा के योग्य भी है
आज शक्तिस्वरूप महिला



लेखक धरती पर प्रकाश सतम्भ,
जो खराब से खराब मौसम में भी
बुझते नहीं, धुंधलाते नहीं,
खुद को जला कर रोशनी करते,
अंधेरे मिटाते, नई राह दिखाते,
उन्नति के शिखर पर ले जाते।




अक्षरों की दुनियां,
अलफाज़ों की दुनियां,
पढ़ने पढ़ाने के रिवाज़ों की दुनियां
आज इन्टरनेट युग में पढ़ने के रिवाज़ न छूटें इसलिए आईए आपका पुस्तकों से तारूफ कराएं।


शब्द मटक मटक चलें तो कहानी,
नृत्य करें तो कविता,
शब्द तीर कमान बनें तो व्यंग्य,
शब्द बिहारी के सतसयै तो लघुकथा
अपने दर्द के आईने से
सारे जहां की पीड़ा का अवलोकन
समूची मानवता का दर्पण
समाज से पाया समाज को अर्पण।




“Feminism has fought no wars. It has killed no opponents. It has set up no cent ration camps, staved no enemies, practiced no cruelties. Its battles have been for education, for the vote, for better working conditions…..for safety on the streets… for child care, for social welfare …..for rape crisis centers, women`s refuges, reforms in the laws. If someone says `Oh, I`m not a feminist, “ I ask ‘why? What`s your problem?’—Dale Spender



कोई कहे सुख का आधार, कोई माने दु:ख का अम्बार बेशक मिलते लाखों दंश इस से बढ़ता हमारा वंश, रिश्तों के धागे में बंधे, एक दूसरे के दु:ख सुख में रमे, बढ़ता जाए यह काफिला। बना रहे स्नेह सम्बन्ध। फैलती रहे नेह सुगंध।



अमूल्य शब्दों के खज़ाने जो कुदरत के शाश्‍वत मूल्य, कुदरत के रहस्य, कुदरत के सिद्धान्त, कुदरत के नियम समझें और समझायें उन नियमों पर चलना सिखाए उन के अर्थ समझाएं जीवन के दर्शन कराए जीवन को सफल बनाए। आप के लिए चुन के लाए।








जीवन रूपी रथ के सारथी की मुख्य भूमिका निभाने वाले युगल वास्तविक ज़िन्दगी में दु:ख, सुख भोगते हुए- कितने ही कवियों की कविता में,
कितने ही लेखकों की कहानियों में
स्वयं उतर आते हैं।

कुछ कही कुछ अनकही
युगलों की कहानी----



पांच दरियाओं की धरती,
पांच दरियाओं का आब,
जहां कुदरत करे कमाल,
गिद्धे भंगड़े की धमाल,
पग-पग बिखरे रंगे जमाल,
सुनहरी कनके, सतरंगी पींघें,
इस धरती के जाये-जहां जाएं छा जाएं।
जिसका जग में नहीं जवाब-
उस धरती का नाम है- पंजाब....




भागमभाग, दौड़धूप, दु:ख तकलीफ
से चुराएं कुछ पल,
कुछ गुनगुनाएं, थिरकें,
सब कुछ भूल कर अपने में खो जाएं।
जीवन के चुनिंदा पलों में पर्व मनाएं,
उत्सव को कुछ यूं मनाएं- जीवन उत्सव हो जाए।
जीवन की सारी कड़वाहत भूल जाएं।





प्यार को वात्सल्य, इश्क, इबादत, स्नेह, मुहब्बत न जाने कितने नामों से जाना जाता है। प्रेम के जितने नाम हैं उतने ही रूप हैं। पर जो रूप सर्वमान्य है वो है पवित्र प्रेम जिसे इबादत का नाम दिया जाता है। पर आज इसके मायने बदल रहे हैं, आज पवित्रता आहत है। प्यार अपने साथ प्रश्‍न चिन्ह लिए खड़ा है।
क्या हैं ..... आज प्रेम के मायने.....???




जीवन के नियम
मनुष्य के कर्त्तव्‍य
पहले जानो- फिर पहचानो
फिर अपनाओ
कर्म योगी बन जाओ
गुरू की शिक्षा-दीक्षा लेकर
जन्म जन्म से मुक्‍त‍ि पाओ।
प्रभु को जानो- प्रभु के हो जाओ।




आज भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में रिश्ते अपने मायने खोते जा रहे हैं, अपनी मासूमियत खोते जा रहे हैं। आओ फिर से नए रास्ते तलाश करें। अखलाक की ज़मीं पर पावन, विश्‍वसनीय रिश्ते बनाएं


मुहब्बत के नए फूल खिलाएं
प्यार के दीप जलाएं....




युवावस्था की दस्तक
नए स्वपन, नई अंगड़ाइयां
तमाम रोकों, तमाम बंदिशों के साथ
अकांक्षाओं, अपेक्षाओं भरा सुहाना सफ़र

Our growing children-Teenagers




वक्‍़त के साथ दिन रात बदलते हैं,
मौसम बदलते हैं,
तन बदलते हैं, मन बदलते हैं।
जो वक्‍़त के साथ नहीं बदला
समझो वह इस दौर से पिछड़ गया,
और जो समझदारी के साथ
नहीं बदला वह भटक गया।

बदलाव की कहानी शब्दों की ज़ुबानी।








उपेक्षित महसूस करती बुज़ुर्ग पीढ़ी
हस्तक्षेप से हताहत नई पीढ़ी
तालमेल की कमी
Generation Gap

आज तेज़ रफ़तार ज़िन्दगी में बेहद व्यथित एवं असमंजस की स्थिति में हैं हमारे घर का आधार-हमारे बुजुर्ग।

प्रश्न कई हैं .....???




हर इंसान समान नहीं
सभी महिलाएं समान नहीं
सभी पुरुष व्यभचारी नहीं
बदले समय में बदलने के बावजूद
औरतों के लिए सहयोगी रवैये के बावजूद
पुरुष शंकाओं से मुक्त क्यों नहीं ?

पुरुष समस्याएं गौण क्यूं ?
कुछ सवाल, कुछ शिकायतें..........





भ्रष्टाचारी, बेरोजगारी,बाल मज़दूरी वेश्यावृत्ति, कन्या भ्रूण हत्या, मज़दूरों का, गरीबों का शोषण, लड़कियों से छेड़छाड़, बलात्कार, बढ़ती नशे की लत, प्रदूषण, बाबाओं का जाल, दहेज, लिंगभेद, जात-पात, कट्टरवाद, आतंकवाद--
मेरा हिन्दोस्तान आज इतना बीमार क्यूं है ?
मेरा हिन्दोस्तान आज इतना लाचार क्यूं है ?




बच्चे प्रत्येक देश का उज्जवल भविष्य होते हैं। यह बच्चे उस सारथी के समान होते हैं। जिन्होंने देश रूपी रथ को सही दिशा में अग्रसर करना होता है। परन्तु आज इस देश का भविष्य स्वयं शोषित हो रहा है भटक रहा है, पशोपेश में है।

आज चिन्तनीय है- बाल्यवस्था।



कोई बात जो होंठों में दबी रह गई, कोई अफसाना जो सुनाया न गया
एक कहानी जो दास्तां न बन पाई
कुछ कहना था पर कह नहीं पाए
या शायद वो सुन नहीं पाए
कितने ही अफसाने हैं जो सुनने हैं सुनाने हैं।