-बलदेव राज भारतीय

लो जी, अब तो सर्वोच्च न्यायालय की भी मुहर लग गई कि दाग अच्छे हैं। दाग अच्छे ही होते हैं, जनता बेचारी यह क्या जाने? जब से माननीय न्यायालय ने दाग़ियों पर लगाम कसने वाला कानून बनाने का निर्णय संसद पर छोड़ दिया है, तब से दाग़ियों की बांछें खिल गई। खिलें भी क्यों न भाई? चोर चोर तो फिर भी मौसेरे भाई होते हैं, पर दाग़ी दाग़ी सगेरे भाई होते हैं। लोकतंत्र की ख़ास बात यह होती है कि यहां संख्या का गणित चलता है और आपको यह बताने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए कि संख्या वाला पलड़ा किसका भारी होगा। फिर दाग़ी वाले मामले में तो वही कानून पास होगा जो सर्वजन हिताय, सर्वनेता हिताय या बहुनेता हिताय होगा। संसद में दलदल वाला खेल जनता के लिए होता है परंतु जब सांसदों के लिए सुविधाओं, वेतन भत्तों की बात हो तो सभी दल दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाई-भाई हो जाते है, और करतल ध्वनि से बिल पास करते हुए न कोई बहस न कोई तर्क, न ख़ज़ाने पर कोई बोझ या भार का ज़िक्र किया जाता है। बस करतल ध्वनि के साथ बिल बिना किसी अड़चन के पास कर दिया जाता है।

परंतु यदि यही कार्य देश हित या लोकहित, कर्मचारियों के वेतन भत्तों का हो तो सभी दल फिर से दलदल में डूब जाते हैं। अब आप ही सोचिए कि दाग़ियों पर कानून बनाने के लिए पटल पर रख भी दिया जाए तो कैसे पास होगा? नहीं होगा, इसीलिए तो सभी नेता लोग पितृपक्ष में भी होली खेल रहे हैं। एक दूसरे पर जमकर कीचड़ उछाल रहे हैं। आख़िर दाग अच्छे हैं न! दाग अच्छे हैं तो होली खेलना तो बनता ही है। जो जितना बड़ा दाग़ी है उतना ही अधिक खुश नज़र आ रहा है। सूखा भूसा खाकर भी पुराने चारे की यादें ताज़ा हो गई हैं। बस एक बार, हां बस केवल एक बार ईवीएम पर भी किसी तरह रोक लग जाये तो कसम से सीना चौड़ा करके के.बी.सी की टैगलाइन को दहाड़ कर बोल सकेंगे कि कब तक रोकोगे? रोकोगे भी कैसे? यह तो जानते हैं कि ईवीएम में गड़बड़ी नहीं हो सकती पर इस बात को फैलाकर लोगों में अविश्वास तो पैदा किया ही जा सकता है। और यदि गड़बड़ी की एक प्रतिशत भी गुंजाइश हो सकती है तो वह गड़बड़ी अपने पक्ष में भी तो करवाई जा सकती है। इससे क्या होगा अगर पकड़े भी गए तो आस्तीन पर कुछ दाग और लग जाएंगे।….. और जब दाग लगेंगे तो दाग तो अच्छे ही होंगे, तो फिर दागों से डरना क्या? इस मामले में तो यह भी नहीं कह सकते कि दाग से घृणा करो दाग़ी से नहीं। आपको दोनों से ही प्यार करना पड़ेगा नहीं तो आप जानते ही हैं……।

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