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  1. साहित्य समाज का दर्पण है। जिसप्रकार दर्पण वास्तविकता को निर्विवाद प्रकट करता है,उसी प्रकार साहित्यिक विधांये समाज को सही मार्गदर्शन प्रदान कर नैतिक मूल्यों के निर्माण मे सहायक बन विकास की नयी परम्परायें प्रकट करता है. हम एक स्वस्थ्य समाज की संरचना करने मे अपना योगदान प्रदान करते रहेंगें। पी.एल.सोनी मतंग,
    सम्पादक अरुणोदय

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