बदलते वक्त में

बदल गए हैं सौंदर्य के मायने

सौंदर्य अपने आप में एक कला है, जिसको आजतक कवियों, लेखकों, बुद्धि-जीवियों, प्रेमियों इत्यादि ने अपने-अपने तरीक़े से देखा और परखा है। कहते हैं सौंदर्य, देखने वाले की आंखों में होता है।

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स्वाधीन देश की स्वाधीन नारियां

मेरा लक्ष्य नारी शोषण के विविध आयाम प्रस्तुत करना नहीं है। उस पर तो यदि नाम सहित प्रमाणिक लेखन हो, तब भी अनेक पुस्तकें बन जाएंगी। यहां मेरा लक्ष्य बहुत सीमित है। मैं आज के परिदृश्य में शिक्षित महिलाओं की दशा प्रस्तुत करना चाहती हूं, जहां विसंगतियां अलग-अलग रूपों में व्याप्त हैं।

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टूटे संयुक्‍त परिवार पड़ी संस्कृति में दरार

-शैलेन्द्र सहगल संस्कारों के बिना संस्कृति उस कलेंडर की भांति है जो उस दीवार पर टंगा रह जाए जिस घर को पुश्तैनी सम्पत्ति के रूप में जाना तो जाए मगर रहने के लिए, जीने के लिए अपनाया न जाए उसे ताला लगाकर उसका वारिस नए और आधुनिक मकान में रहने चला जाए। कलेंडर बनी संस्कृति में उन तिथियों की भरमार ...

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वक़्त के साथ बदली है मर्द मानसिकता भी

-मंजुला दिनेश   आदिकाल से ही स्त्री-पुरुष संबंधों पर विभिन्न कोणों से विचार मंथन जारी है। यह एक ऐसी गुत्थी है जो समय परिवेश और परिस्थितियों के अनुरूप कभी उलझती और कभी सुलझती रही है। स्त्री को ऐसी अनबूझ पहेली के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसे आम आदमी तो क्या देवता भी समझने में सक्षम नहीं। औरतों को शंका ...

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