Author Archives: saropama

नए वर्ष का प्रवेश द्वार

जी हां, सबकी रग-रग में बस चुका, मैं हूं भ्रष्टाचार। नववर्ष में भी बढ़ेगा अभी मेरा परिवार। झट से खोलो द्वारपाल, मेरे लिए नववर्ष का द्वार।’

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समुद्र के ओर की खिड़की

मैंने तो उसे साफ़ कह दिया था बाक़ी जो मर्ज़ीं करता रह। यह मेरा पेशा है परन्तु मेरे होंठों पर केवल एक का ही अधिकार है। होंठों को अमर के बिना और कोई नहीं छू सकता।

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भारतीय सिनेमा के हास्‍य अभिनेता

                हंसी-मज़ाक के बिना ज़िंदगी का कोई मोल नहीं। ये हंसी ही ज़िंदगी के सभी पलों को सच्चा जीवन प्रदान करती है और बड़े से बड़े मुश्किल लम्हों को सहन करने की शक्‍ति देती है। जहां हंसना बेहद आसान है वहीं किसी को हंसाना उतना ही कठिन। पर भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनेताओं की कोई कमी नहीं है जो इस तरह ...

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वेश्यावृत्ति नारी जाति पर कलंक है

– शैलेन्द्र सहगल औरत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया। अबला नारी तेरी अजब कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी। वक्‍़त बदल गया दुनिया बदल गई। नहीं बदली तो औरत के वजूद से जुड़ी यह स्थितियां नहीं बदली। वो देवदासी भी बनी तो भी देह उसे परोसनी पड़ी, देह व्यापार का कलंक मानव सभ्यता ...

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